الرئيسيةप्रमुख खबरें5G internet का भारत समेत दुनियाभर में क्यों हो रहा विरोध

5G internet का भारत समेत दुनियाभर में क्यों हो रहा विरोध

देश के सरकारी पैनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 5G internet के साथ डाटा नेटवर्क स्पीड 2 से 20 जीबी प्रति सेकेंड तक होने की उम्मीद है। अभी दुनिया के 34 देशों के 378 शहरों में ही 5जी इंटरनेट उपलब्ध है। अभी इस पर पर्याप्त अध्ययन करने की जरूरत है, जिससे कई और जानकारियां सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि अभी इस तकनीक को लेकर विशेषज्ञों में अलग-अलग मत है। कुछ इसे डिजिटल वर्ल्ड के लिए आवश्यक बताते हैं तों वहीं ऐसे विशेषज्ञों की भी कमी नहीं है जो कि इसे धरती के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। भारत के लिए इस तकनीक को पूरी तरह से लागू कर पाना एक बड़ी चुनौती है।

भारत में वर्ष 2021 के अंत तक 5जी इंटरनेट लॉच हो सकता है।मोबाइल कंपनियों ने देश में 5G स्मार्टफोन की बिक्री शुरू कर दी है। वर्ष 2018 में गुड़गांव में चीनी कंपनी हुवेई ने 5जी इंटरनेट की टेस्टिंग की थी।

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5G नेट के फ़ायदे 

1. इंटरनेट की रफ्तार 20 से 100 गुना तेज (1000mbps तक) हो जाएगी।

2. बड़े से बड़े डेटा को आसानी से अपलोड, डाउनलोड या ट्रांसफर किया जा सकेगा।

3. अभी जो फिल्म 5-10 मिनट में डाउनलोड होती है, वो चंद सेकेंड में डाउनलोड होगी।

4. हाई क्वॉलिटी वीडियो या गेम का मजा बिना किसी रुकावट के लिया जा सकेगा।

5. घर के सभी स्मार्ट डिवाइसेज को फोन से कनेक्ट कर बाहर से कंट्रोल कर सकेंगे।

6. एक साथ कई यूजर्स जुड़ने पर भी इंटरनेट की रफ्तार कम नहीं होगी।

7. अभी जो काम कंप्यूटर या लैपटॉप से ही हो सकते हैं, उन्हें मोबाइल से भी किया जा सकेगा।

8. तेज रफ्तार इंटरनेट से रोबोट, ड्रोन और ऑटोमैटिक वाहनों का संचालन आसान होगा।

5G नेट के नुक़सान 

1. इससे इंटरनेट यूजर्स की निजता को सबसे बड़ा खतरा है।

2. टेक्निकल युनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन के अनुसार हैकर्स यूजर्स का डाटा ज्यादा तेजी और आसानी से हैक कर सकते हैं।

3. नीदरलैंड के हेग शहर में कुछ माह पहले 5G टेस्टिंग के दौरान अचानक 297 पक्षियों की मौत हो गई थी।

4. इसके लिए ज्यादा बैंडविथ की आवश्यकता होती है, जिसके लिए टॉवरों की संख्या कई गुना बढ़ानी होगी।

5. पर्याप्त मोबाइल टॉवर न होने पर इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या मौजूदा समय से बढ़ जाएगी।

6. मोबाइल टॉवर्स को रेडियेशन के लिए खतरनाक माना जाता है, लिहाजा तमाम देशों में लोग इसका विरोध करते हैं।

7. 5G नेटवर्क के लिए 6GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी की जरूरत होगी, जो पहले ही सैटेलाइट्स व अन्य सिग्नल से भरी हुई है।

8. रेडियो फ्रीक्वेंसी भी तेज रफ्तार इंटरनेट उपलब्ध कराने की राह में रोड़ा डाल सकती है।

9. WHO के अनुसार रिडेयो फ्रिक्वेंसी बढ़ने से शरीर का तापमान बढ़ता है, हालांकि स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान नहीं है।

यही वजह है कि अप्रैल 2020 में नीदरलैंड में 5G नेटवर्क का विरोध कर रहे लोगों ने कई टेलीफोन टॉवर तोड़कर उन्हें आग के हवाले कर दिया था। इनकी चिंता 5G नेटवर्क के संभावित खतरों और निजता की सुरक्षा को लेकर है। जनवरी में एम्सटरडैम के डैम स्क्वॉयर पर लगभग 100 लोगों ने एकत्र होकर 5जी नेटवर्क का विरोध किया था। 

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