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सरकारी स्कूलों में नाम की शिक्षा, शिक्षक नहीं होने से बच्चे पढ़ने में असमर्थ

रायपुर। रायपुर में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। प्राथमिक शाला से लेकर हायर सेकंडरी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं है। सबसे ज्यादा बुरा हाल प्राथमिक शालाओं का है। यहां कहीं-कहीं एक ही शिक्षक है। जबकि नियमानुसार प्राथमिक शाला में कक्षा एक से पांच तक के लिए प्रधानपाठक सहित सहायक शिक्षक और एक स्वीपर होना चाहिए। ये संख्या 40 विद्यार्थियों की संख्या के लिए है। इससे अधिक होने पर एक अतिरिक्त शिक्षक तैनात करने का प्रावधान है। पूर्व माध्यमिक शाला, हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों के भी हैं। ज्यादातर हायर सेकंडरी स्कूलों में खासकर 11 वीं और 12 वीं स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक ही नहीं है।

आपको बात दे हायर सेकंडरी स्कूलों में विषय विशषेज्ञ शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने के डर से ज्यादातर बच्चे आसपास के निजी स्कूलों में दाखिला लेने पर मजबूर हो रहे हैं। ताकि 11 वीं और 12 वीं की पढ़ाई ठीक से कर सकें। हायर सेकंडरी स्कूलों में 6948 शिक्षकों की कमी हैं, जबकि इन हायर सेकंडरी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में 434954 स्टूडेंट्स थे। वहीं शिक्षकों की संख्या 30381 हैं।

ये सही है कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से शिक्षकों की भारी कमी है। हमने भर्ती करने का निर्णय लिया था। लेकिन आरक्षण का मसला राजभवन में अटका हुआ है, इसलिए भर्ती अटकी हुई है।
आरक्षण लागू होते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

वर्तमान में स्कूलों की संख्या इतनी प्रदेश में वर्तमान में कुल स्कूलों की संख्या 56 हजार 494 स्कूल है। इनमें प्राइमरी में 32,766, मिडिल में 16, 453, हाईस्कूल में 2,732 और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 4,543 है। वहीं निजी स्कूलों की संख्या 6,430 हैं।

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