भोपाल। तरह-तरह के प्रलोभन देकर लोगों को आनलाइन कर्ज के जाल में फंसाने वाले अवैध एप प्रतिबंधित कराने की केंद्र सरकार से सिफारिश की जाएगी। मध्य प्रदेश पुलिस ऐसे एप को चिह्नित कर उनकी सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को देगी। यह निर्णय शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में उनके आवास पर सुबह हुई बैठक में लिया गया है। बैठक में पुलिस एवं राज्य गृह विभाग के सभी बड़े अधिकारी मौजूद रहे। भोपाल में आनलाइन कर्ज के जाल में फंसे विश्वकर्मा दंपती द्वारा दो बच्चों समेत आत्महत्या कर लेने की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई थी।
बैठक में सीएम ने विश्वकर्मा परिवार के साथ हुई घटना के बारे में अधिकारियों से जानकारी लेकर आरोपितों को पकड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने इस तरह का एप चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि परिवारों को इस तरह बर्बाद होते नहीं देखा जा सकता। तकनीक का उपयोग कर ऐसी घटनाओं को रोका जाए और दोषियों को दंडित किया जाए। लोगों को साइबर अपराध से बचाने के लिए पुलिस अभियान चलाए। इसके लिए एक पृथक कार्ययोजना बना कर अमल किया जाए।
जनता को आनलाइन ऋण उपलब्ध कराने का प्रलोभन देने वालों पर नजर रखें। जिस एप के माध्यम से यह अपराध होते हैं, उनका संचालन करने वालों की धरपकड़ की जाए। यदि स्थानीय लोग इनमें शामिल नहीं हैं और देश के अन्य स्थानों या विदेश से ऐसी अवैध गतिविधियों का संचालन हो रहा हो तो उन तक पहुंचने के लिए दल भी भेजे जाएं।
कर्ज देकर परेशान करने की शिकायतें पुलिस को मिलें तो उस पर त्वरित कार्यवाही करें। जागरूकता अभियान में विद्यालय और महाविद्यालयों में व्याख्यान भी होना चाहिए ताकि विद्यार्थी आनलाइन ऋण के प्रलोभन से बचें। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह डा. राजेश राजौरा, डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना, एडीजी आदर्श कटियार, पुलिस आयुक्त भोपाल हरिनारायण चारी मिश्र उपस्थित थे।
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