जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करने के साथ ही पार्टी के जम्मू दफ्तर में हंगामा शुरू हो गया। भाजपा ने सुबह 10 बजे 44 उम्मीदवारों के नामों की पहली लिस्ट जारी की, जिसमें तीन चरणों के कैंडिडेट्स के नाम थे। लेकिन दो घंटे बाद, पार्टी को इस लिस्ट को वापस लेने और नई लिस्ट जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। नई लिस्ट में केवल पहले चरण के उम्मीदवारों के नाम थे, जो स्पष्ट रूप से असंतोष का कारण बना।
नई लिस्ट के आने के बाद भी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन जारी रखा। ओमी खजुरिया के समर्थकों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नारेबाजी की। उनका आरोप था कि भाजपा पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर रही है और नई लिस्ट में कांग्रेस से भाजपा में आए नेता को टिकट दिया गया है। यह कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज करने का संकेत देता है, जो कि पार्टी की स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने जब कार्यकर्ताओं के विरोध को देखा, तो उन्होंने खुद को अपने केबिन में बंद कर लिया। यह स्थिति यह दर्शाती है कि पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने में कितनी असहजता महसूस कर रहा था। बाद में उन्होंने कार्यकर्ताओं से बातचीत करने का आश्वासन दिया, लेकिन यह स्थिति पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल उठाती है।
पहली लिस्ट में तीन प्रमुख नेताओं, पूर्व डिप्टी सीएम निर्मल सिंह, कविंद्र गुप्ता, और पार्टी अध्यक्ष रविंद्र रैना का नाम न होना, यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर गहरे मतभेद और असंतोष हो सकते हैं। ये नेता भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं और उनकी अनुपस्थिति से पार्टी की रणनीतियों पर प्रश्न चिह्न लग सकता है।
जम्मू-कश्मीर के मीडिया प्रभारी सज्जाद का यह कहना कि पहली लिस्ट टाइपिंग एरर के कारण रद्द की गई, इसे कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे बयान पार्टी की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकते हैं और समर्थकों के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं।
भाजपा की पहली लिस्ट के विवाद ने चुनावी माहौल में एक नई हलचल पैदा कर दी है। अगर पार्टी ने जल्दी ही इन मुद्दों का समाधान नहीं किया, तो इससे चुनावी प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। आगामी चुनावों में 18 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच तीन चरणों में मतदान होगा, और 4 अक्टूबर को नतीजे घोषित होंगे।