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सलकनपुर ही नहीं भोपाल के इस मंदिर में भी हैं 300 सीढियां, जूते-चप्पल चढ़ाने की है परंपरा

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित सिद्धिदात्री पहाड़वाली माता का मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। अन्य धार्मिक स्थलों की तरह जहां भक्त फूल-माला, प्रसाद या चुनरी चढ़ाते हैं, इस मंदिर में माता को खुश करने और मन्नतें पूरी होने के लिए भक्त जूते-चप्पल, सैंडल, कंघी, छाता, और चश्मा जैसे वस्त्र चढ़ाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी श्रद्धालु इसे उत्साहपूर्वक निभाते हैं।

अनोखी परंपरा का कारण

सिद्धिदात्री माता को मंदिर में बेटी के रूप में पूजा जाता है, और यहां माता का बाल रूप स्थापित है। भक्त इस रूप को दुलार और स्नेह के साथ पूजते हैं, जिसके चलते जूते-चप्पल चढ़ाने की यह अनोखी प्रथा शुरू हुई। भक्तों का मानना है कि जूते-चप्पल और अन्य वस्त्र चढ़ाने से माता जल्दी प्रसन्न होती हैं और उनकी मन्नतें पूरी करती हैं। इस मंदिर की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि विदेशों से भी श्रद्धालु माता के लिए जूते-चप्पल भिजवाते हैं।

पुजारी की मान्यता

मंदिर के पुजारी ओम प्रकाश का कहना है कि माता के प्रसन्न या नाराज होने का संकेत उन्हें तुरंत मिल जाता है। जब माता नाराज होती हैं, तो पुजारी उनके वस्त्र बदल देते हैं। यह भी मान्यता है कि जब माता दुखी होती हैं, तो भक्त उनकी सेवा में विशेष ध्यान देते हैं। अब तक माता को 15 लाख से अधिक वस्त्र पहनाए जा चुके हैं।

नवरात्रि में विशेष भीड़

मां सिद्धिदात्री मंदिर कोलार की पहाड़ी पर स्थित है और इस मंदिर की स्थापना ओमप्रकाश महाराज ने करीब 30 वर्ष पहले की थी। इस मंदिर में पहुंचने के लिए भक्तों को तकरीबन 300 सीढ़ी चढ़कर पहाड़ी पर पहुंचना पड़ता है। शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। श्रद्धालु 125 सीढ़ियां चढ़कर माता के दर्शन करने आते हैं और अपनी मुरादें मांगते हैं। भक्तों का यह भी विश्वास है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं।

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