छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पहाड़ी कोरवा महिलाएं अपनी पारंपरिक कला से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ये महिलाएं जंगलों में पाई जाने वाली ‘बिरनी’ घास का उपयोग कर बेहद मजबूत झाड़ू तैयार कर रही हैं, जो स्थानीय बाजार में काफी पसंद की जा रही है।
दो साल तक चलने वाली टिकाऊ झाड़ू
ग्रामीणों का कहना है कि बिरनी से बनी ये झाड़ू बाजार में मिलने वाली प्लास्टिक या अन्य झाड़ुओं की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होती है। इसे बनाने में दो दिन तक सुखाने और करीब एक घंटे की मेहनत लगती है, जिसके बाद यह दो साल तक आसानी से चलती है।
आजीविका का नया साधन
इस हुनर के जरिए महिलाएं न केवल अपने घरों की सफाई के लिए बेहतर उपकरण बना रही हैं, बल्कि इसे बेचकर अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार रही हैं। यह पहल आदिवासी महिलाओं की पारंपरिक जानकारी और उनके उद्यमिता कौशल का एक बेहतरीन उदाहरण है।