वर्ष 2015 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा ने एक ऐसा कारनामा किया, जिसे क्रिकेट के इतिहास में सबसे दुर्लभ माना जाता है। मुरली विजय के चोटिल होने के बाद ओपनिंग करने आए पुजारा ने चुनौतीपूर्ण पिच पर डटकर बल्लेबाजी की और नाबाद रहकर इतिहास रच दिया।
मुश्किल पिच पर पुजारा का संयम
सिहंली स्पोर्ट्स क्लब की हरी और सीमिंग पिच पर श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना करना बेहद कठिन था। पुजारा ने अपनी तकनीक और धैर्य का परिचय देते हुए 289 गेंदों का सामना किया और 145 रनों की नाबाद पारी खेली।
क्या है ‘कैरिंग द बैट’ रिकॉर्ड?
जब कोई ओपनिंग बल्लेबाज पारी की शुरुआत से अंत तक नाबाद रहता है, तो उसे ‘कैरिंग द बैट’ कहा जाता है। पुजारा ने उस मैच में पूरी पारी के दौरान क्रीज पर टिके रहकर इस दुर्लभ उपलब्धि को अपने नाम किया और भारतीय टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई।