बांग्लादेश इन दिनों गंभीर प्राकृतिक गैस की कमी से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। बिजली संकट के बाद आई इस नई मुसीबत ने औद्योगिक उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
बंद हुए कारखाने और घटता उत्पादन
गैस की किल्लत का सबसे बुरा असर आशुगंज खाद कारखाने पर पड़ा है, जो मार्च 2025 से पूरी तरह बंद है। रोजाना 1000 टन यूरिया का उत्पादन करने वाला यह सरकारी संयंत्र अब निष्क्रिय पड़ा है, जिससे हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर संकट आ गया है और देश में खाद की कमी की आशंका गहरा गई है।
अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव
गैस की कमी केवल कारखानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन और घरेलू जरूरतों पर भी साफ दिख रहा है। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो औद्योगिक गतिरोध के कारण बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति और बदतर हो सकती है।