इंदौर के एमवाय अस्पताल में अब नवजात शिशुओं की सिकल सेल बीमारी की जांच जन्म के पहले 24 घंटों के भीतर ही की जाएगी। केंद्र सरकार की वित्तीय और तकनीकी सहायता से शुरू होने वाली इस पहल का उद्देश्य बीमारी का समय रहते पता लगाकर बच्चों को बेहतर उपचार मुहैया कराना है।
समय पर पहचान से मिलेगी राहत
अभी तक सिकल सेल के लक्षण दिखने पर ही इलाज शुरू हो पाता था, लेकिन अब शुरुआती स्क्रीनिंग से जोखिम वाले बच्चों की पहचान तुरंत संभव होगी। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने सेंटर के कार्यों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण बताया है, जिससे विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
आधुनिक तकनीकों का विस्तार
अस्पताल प्रशासन अब सेंटर में एचएलए टाइपिंग जैसी उन्नत सुविधाएं शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिससे बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रियाओं में मदद मिलेगी। पहले से उपलब्ध रेड सेल एक्सचेंज और अन्य आधुनिक संसाधनों के साथ, यह सेंटर अब सिकल सेल के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त होगा।