छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुंवर बड़ा नाम के एक बुजुर्ग अपनी अनूठी कला से पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, प्लास्टिक की बोरियों से निकलने वाली रस्सियों का उपयोग कर मछली पकड़ने के विशेष जाल बनाने में महारत हासिल की है।
मेहनत और मजबूती का प्रतीक
इस जाल को तैयार करने में कुंवर बड़ा को करीब 6 से 7 महीने का समय लगता है। बाजार में मिलने वाले जालों की तुलना में उनका बनाया हुआ जाल कहीं अधिक मजबूत और टिकाऊ होता है, जो एक बार में दो किलो तक मछलियां पकड़ने में सक्षम है।
पुरखों की विरासत का संरक्षण
कुंवर बड़ा ने यह हुनर अपने बुजुर्गों को देखकर सीखा है। आज के दौर में भी वे इस पारंपरिक कौशल को सहेजकर न केवल अपनी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश कर रहे हैं।