MP News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में उस समय चौंकाने वाला नज़ारा देखने को मिला जब NEET-UG परीक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायालय की बत्तियाँ बुझा दी गईं। जजों ने कहा कि हम खुद अनुभव करना चाहते हैं कि अंधेरे में छात्रों ने परीक्षा कैसे दी होगी। यह अनोखा कदम उस तर्क को प्रत्यक्ष रूप से परखने के लिए उठाया गया जिसमें कहा गया था कि परीक्षा केंद्रों पर बिजली नहीं थी और छात्रों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने फिलहाल इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है
इंदौर के 49 परीक्षा केंद्रों में से 18 में बिजली संकट, छात्रों की भविष्य पर सवाल
मामला 4 मई को हुई NEET-UG परीक्षा से जुड़ा है, जब इंदौर में आंधी और तेज़ बारिश के कारण कई परीक्षा केंद्रों में बिजली चली गई थी। कोर्ट को बताया गया कि 49 में से 18 केंद्रों में बिजली नहीं थी और किसी भी केंद्र में बिजली बैकअप की व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते कम रोशनी में छात्रों को परीक्षा देनी पड़ी। एक वीडियो में परीक्षा केंद्र के अंदर अंधेरा साफ दिखाई दे रहा था, जबकि एक अन्य वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी बिजली की शिकायत करने वाले अभिभावकों को डरा रहे थे।

याचिकाकर्ताओं की मांग: इंदौर में दोबारा कराई जाए परीक्षा
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकीलों मृदुल भटनागर और नितिन भाटी ने कोर्ट में दलील दी कि यह छात्रों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने बताया कि पर्यवेक्षकों ने भी स्वीकार किया कि बिजली कटने के बाद परीक्षा कक्षों में दृश्यता एक मीटर से भी कम थी जबकि सामान्यतः यह छह मीटर होती है। बरसात और हवा के कारण खिड़कियाँ बंद करनी पड़ीं जिससे हालात और खराब हो गए। इसलिए सभी प्रभावित परीक्षा केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराना न्यायसंगत होगा।
एनटीए का विरोध: लाखों छात्रों के हित में दोबारा परीक्षा नहीं संभव
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दोबारा परीक्षा कराने का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि पूरे देश में 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने यह परीक्षा दी है और केवल इंदौर के कुछ केंद्रों की समस्याओं को आधार बनाकर दोबारा परीक्षा कराना लाखों छात्रों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इंदौर के प्रभावित केंद्रों में से सिर्फ 11 छात्रों ने 600 से ज्यादा अंक हासिल किए हैं और यह संख्या उस स्तर की नहीं है जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दे।
अब फैसले पर टिकी सबकी नजर, क्या दोबारा होगी परीक्षा?
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि व्यवस्था में हुई गड़बड़ी से परीक्षा के परिणामों पर खास प्रभाव नहीं पड़ा। लेकिन याचिकाकर्ता इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं हैं। कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रख लिया गया है और अब सभी की निगाहें इसपर टिकी हैं कि क्या न्यायालय इस आधार पर परीक्षा दोबारा कराने का आदेश देगा या नहीं। यह फैसला न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए मिसाल साबित हो सकता है।


