MP Politics: कांग्रेस प्रवक्ताओं और आईटी सेल पदाधिकारियों के सोशल मीडिया अकाउंट हुए सस्पेंड, पार्टी ने जताई साजिश की आशंका

MP Politics: मध्यप्रदेश में कांग्रेस प्रवक्ताओं और आईटी सेल से जुड़े कई नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स—जैसे कि वॉट्सऐप, फेसबुक और एक्स को सोशल मीडिया कंपनी द्वारा बैन कर दिया गया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई उनकी भाजपा सरकार और संगठन के खिलाफ लगातार की जा रही आलोचनाओं के चलते की गई है।

इंदौर के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया का वॉट्सऐप अकाउंट बीते 10 दिनों से परमानेंट बैन कर दिया गया है, वहीं उनका फेसबुक और एक्स हैंडल भी 24 घंटे के बैन के बाद रिस्ट्रीक्शन मोड में डाल दिया गया है। इसी प्रकार, भोपाल से प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बरोलिया, जिला आईटी सेल अध्यक्षों और करीब 20 अन्य प्रवक्ताओं के सोशल अकाउंट्स या तो बंद कर दिए गए हैं या उन पर सीमित पहुंच लागू कर दी गई है।

भाजपा पर ‘सर्विलांस’ और ‘सोशल मीडिया टारगेटिंग’ का आरोप…

कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने रणनीतिक रूप से उन एक्टिव अकाउंट्स की सर्विलांस रिपोर्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजी, जिनसे भाजपा के खिलाफ सवाल उठाए जा रहे थे। उसके बाद मेटा द्वारा इन अकाउंट्स को बंद किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पर जो भी पोस्ट्स किए जा रहे थे, उन्हें टारगेट कर रिपोर्ट किया गया और उसके बाद कई अकाउंट्स पर परमानेंट बैन लगा दिया गया।

मोबाइल नंबर भी हो रहे लिंक से बाहर, लोगों को फर्जी नंबर से जोड़ रही मेटा?

कांग्रेस के आईटी सेल से जुड़े कई पदाधिकारियों ने यह भी शिकायत की है कि अकाउंट बंद होने के बाद जब वे नए नंबर से वॉट्सऐप चालू कर रहे हैं, तो उन्हें फर्जी नामों से जोड़ा जा रहा है, जिससे पहचान में भ्रम फैल रहा है। इससे कार्यकर्ताओं को नई ग्रुप्स बनाने और अभियान चलाने में दिक्कत आ रही है।

कांग्रेस ने की शिकायत, AICC और सोशल मीडिया हेड से भी संपर्क…

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रभारी अभय तिवारी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर AICC की सोशल मीडिया विंग में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई गई है। साथ ही मेटा के भारत ऑफिस के हेड ऑफ डिपार्टमेंट से भी संपर्क किया गया है ताकि अकाउंट्स की बहाली हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

राजनीतिक हमले या प्लेटफॉर्म नीति का असर?

विशेषज्ञों की मानें तो यह घटना राजनीतिक हस्तक्षेप और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट पॉलिसी के बीच की जंग को दर्शाती है। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सोशल मीडिया नियमों का पालन न करने के कारण की गई, या यह राजनीतिक विरोध को दबाने की कोशिश है? फिलहाल कांग्रेस ने मामले को राजनीतिक दमन करार देते हुए इसे सार्वजनिक मंच पर उठाने और कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है।

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