National Doctor’s Day: आजकल जब भी आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं, वो सबसे पहले यही कहते हैं – ‘अपनी लाइफस्टाइल सुधारिए’। दरअसल, अधिकतर बीमारियां दवाओं से नहीं बल्कि गलत दिनचर्या और खानपान से पैदा होती हैं। चाहे वो डायबिटीज हो, हाई बीपी, मोटापा या थायराइड, इनके पीछे सबसे बड़ा कारण हमारी खुद की लापरवाही होती है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार दवाएं भी तभी असर करती हैं जब हमारी जीवनशैली उन्हें सपोर्ट करे।
सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम बना है नया खतरा
AIIMS दिल्ली के डॉ. नीरज निष्चल कहते हैं कि आजकल लोग देर रात तक मोबाइल चला रहे हैं। इसकी वजह से नींद खराब होती है और हार्मोनल असंतुलन के साथ मोटापा जैसी दिक्कतें जन्म लेती हैं। दिनभर बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना, बिना भूख के स्नैक्स खाना और बार-बार मीठा खाना हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। ये आदतें इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों को बुलावा देती हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि अब लोग छोटी-छोटी तकलीफ में भी दवाएं लेने लगते हैं और कई बार डॉक्टर से बिना पूछे लंबे समय तक दवाएं लेते रहते हैं। जैसे कि पेनकिलर्स, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉइड्स और एंटासिड। इनके लंबे समय तक इस्तेमाल से शरीर को नुकसान होता है और एक समय ऐसा आता है जब दवा का असर ही खत्म हो जाता है। इसे ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है, जो चिंता का कारण बन गया है।
स्वस्थ रहने के लिए कैसी हो दिनचर्या
एक अच्छी दिनचर्या ही स्वस्थ शरीर का आधार है। सुबह जल्दी उठना, उठते ही पानी पीना, थोड़ी देर धूप में रहना और नाश्ते में प्रोटीन से भरपूर चीजें खाना बेहद जरूरी है। दोपहर का खाना समय पर और खाने के बाद 10-15 मिनट की वॉक शरीर को ऊर्जा देती है। सुबह या शाम थोड़ी बहुत एक्सरसाइज और रात 10 बजे से पहले सो जाना चाहिए। सोने से पहले फोन या लैपटॉप से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
डॉ. सुभाष गिरी कहते हैं कि डॉक्टर्स डे पर असली संदेश यही होना चाहिए कि हम दवाओं के बजाय जीवनशैली पर ध्यान दें। बीमारी की जड़ अगर जीवनशैली में है तो इलाज की शुरुआत भी वहीं से होनी चाहिए। नींद, खानपान, तनाव और फिजिकल एक्टिविटी को बैलेंस करना ही असली हेल्थ है। यही बदलाव हमें दवाओं से मुक्त कर सकते हैं।


