Ujjain News: सोमवार को स्कूल बंद और रविवार को क्लास! उज्जैन में बाबा महाकाल के लिए बदली पढ़ाई की टाइमिंग

Ujjain News: उज्जैन जैसे धार्मिक नगरी में जब श्रावण-भादों का महीना आता है तो आस्था की लहर पूरे शहर को घेर लेती है। बाबा महाकाल की प्रसिद्ध सवारी लाखों भक्तों को आकर्षित करती है। हर सोमवार को निकलने वाली इस सवारी के कारण पूरे शहर में भारी भीड़ और ट्रैफिक होता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि इस दौरान सभी सरकारी और अर्द्धसरकारी स्कूल सोमवार को बंद रहेंगे और उनकी छुट्टी के बदले रविवार को स्कूल खोले जाएंगे।

 जाम से बचने और श्रद्धालुओं को सुविधा देने की पहल

बाबा महाकाल की सवारी पुराने शहर की संकरी गलियों से गुजरती है। ऐसे में जब हजारों भक्त इन गलियों में पैदल चलते हैं तो जरा-सी भी असुविधा से भगदड़ जैसे हालात बन सकते हैं। इस दौरान अगर स्कूली बसें भी उन्हीं रास्तों से गुजरेंगी तो जाम और अफरातफरी का खतरा और बढ़ जाता है। इसीलिए प्रशासन ने यह समझदारी भरा फैसला लिया है कि स्कूल बसें इन रास्तों से दूर रहें और भक्तों को शांतिपूर्वक दर्शन का अवसर मिले।

Ujjain News: सोमवार को स्कूल बंद और रविवार को क्लास! उज्जैन में बाबा महाकाल के लिए बदली पढ़ाई की टाइमिंग

 सवारी के विशेष दिनों पर लागू रहेगा नियम

उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह के मुताबिक इस साल बाबा महाकाल की सवारी 14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई, 4 अगस्त और 11 अगस्त को निकलेगी। इन सभी पांच सोमवारों को स्कूल बंद रहेंगे और एक दिन पहले यानी रविवार को स्कूल लगेंगे। 18 अगस्त को जब बाबा की शाही सवारी निकलेगी, तब स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। इस पूरे बदलाव का मकसद बच्चों और श्रद्धालुओं दोनों की सुविधा सुनिश्चित करना है।

 बच्चों की पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा

हालांकि स्कूल सोमवार को बंद रहेंगे लेकिन रविवार को खुले रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि कुल शिक्षण दिवसों में कोई कटौती न हो। रविवार को बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी ताकि वे नियमित पढ़ाई से जुड़े रहें। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को धार्मिक परिवेश में शामिल होने का भी अवसर मिलेगा और पढ़ाई में भी कोई रुकावट नहीं आएगी।

आस्था और प्रशासनिक सूझबूझ का अद्भुत संगम

उज्जैन प्रशासन का यह निर्णय दर्शाता है कि कैसे आस्था और शिक्षा को साथ लेकर चला जा सकता है। यह केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और बच्चों की सुविधा का संतुलित उदाहरण है। श्रावण-भादों में महाकाल की सवारी का उल्लास उज्जैन की आत्मा में बसता है और इस बार स्कूलों का समय बदलकर यह उत्सव और भी व्यवस्थित बन जाएगा।

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