Bhopal। राज्य सरकार ने रविवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ी सर्जरी करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस फेरबदल के केंद्र में मुख्यमंत्री सचिवालय, मुख्य सचिव अनुराग जैन, और उनके ‘गुड बुक’ में माने जाने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों की भूमिका अहम रही।
नीरज मंडलोई की एंट्री और सीएम की ‘गुड बुक’…
नीरज मंडलोई को मुख्यमंत्री कार्यालय का नया अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। उनके पास ऊर्जा विभाग और लोक सेवा प्रबंधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। सूत्रों का कहना है कि मंडलोई न केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बेहद करीबी हैं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें “टास्क मास्टर” की छवि भी प्राप्त है। सिंहस्थ 2028 को सफल बनाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। उज्जैन में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री का भरोसा जीता था।
राजेश राजौरा को हटाने के पीछे कारण क्या?
मुख्यमंत्री सचिवालय में अब तक अपर मुख्य सचिव रहे डॉ. राजेश राजौरा को मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ तालमेल नहीं बन पाने की वजह से हटाया गया है। कुछ जानकार इसे राजौरा बनाम जैन की खींचतान का नतीजा बता रहे हैं। हालांकि, राजौरा को ‘साइडलाइन’ नहीं किया गया है बल्कि उन्हें जल संसाधन विभाग के साथ-साथ नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई है। जो आने वाली केन-बेतवा (₹45,000 करोड़) और कालीसिंध (₹35,000 करोड़) परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी है।
क्या राजौरा बनेंगे अगले मुख्य सचिव?
राज्य के मौजूदा मुख्य सचिव अनुराग जैन अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यदि वे सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) नहीं लेते, तो डॉ. राजेश राजौरा का मुख्य सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह स्क्रिप्ट 4 महीने पहले ही लिख दी गई थी और रविवार की इस नियुक्ति के बाद अब इस संभावना को और बल मिल गया है।
संजय दुबे का उदय, संजय शुक्ल की विदाई…
राज्य सरकार ने नगरीय प्रशासन विभाग की कमान संजय दुबे को सौंपी है। जिन्हें शिवराज सरकार में ‘शिवराज का बिल्ला’ तक कहा गया था। कभी कमलनाथ सरकार में ‘दिग्विजय सिंह के करीबी’ माने जाने वाले संजय दुबे सबसे महत्वपूर्ण विभाग नगरीय प्रशासन और आवास दिया गया तो अब फिर डॉ मोहन सरकारमें भी वही विभाग इसलिए कहते हैं कॉग्रेस की सरकार हो या बीजेपी की संजय दुबे के दोनों हाथों में लड्डू रहते हैं। दूसरी तरफ, संजय कुमार शुक्ल, जिन्हें अनुराग जैन की नाराजगी का शिकार माना जा रहा है, उनको सामान्य प्रशासन विभाग भेजा गया है।
ब्यूरोक्रेसी में क्या बदल रहा है?
यह बदलाव केवल चेहरों का नहीं, संकेतों का भी है। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीट एंड क्लीन गवर्नेंस के लिए नौकरशाही में भी विश्वास और दक्षता का संतुलन जरूरी है। वे उन अफसरों पर भरोसा जता रहे हैं, जिनका रिकॉर्ड ‘डिलीवरी’ और ‘समन्वय’ में मजबूत है। वहीं, असंतुलन या सामंजस्य की कमी वाले अधिकारियों को यथोचित जिम्मेदारियों में समायोजित किया जा रहा है, न कि पूरी तरह हाशिए पर डाला जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नौकरशाही के भीतर अपने सटीक टीमवर्क की नींव रख दी है। राजेश राजौरा का मुख्य सचिव बनना, नीरज मंडलोई का सत्ता-संगठन-प्रशासन के संयोजन में उभार और संजय दुबे जैसे ‘राजनीतिक पहचान’ वाले अफसर की वापसी इन तीनों बिंदुओं से संकेत मिलता है कि मध्यप्रदेश की नौकरशाही अब केवल प्रशासकीय दक्षता नहीं, राजनीतिक सामंजस्य के हिसाब से भी खुद को नए सांचे में ढाल रही है।


