Monkey Curfew in Ratlam: रतलाम जिले की आलोट तहसील के हिंगड़ी गांव में एक बंदर ने ऐसा आतंक मचाया कि पूरा गांव दहशत में जी रहा है। बंदर की हिंसा की वजह से गांव में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल बन गया है। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और जो जरूरी काम से भी निकलते हैं वे हाथों में डंडा लेकर ही बाहर जाते हैं। यह मामला आम नहीं है बल्कि बंदर ने पिछले 15 दिनों में 13 लोगों पर हमला किया है जिससे गांव में डर और चिंता का माहौल है।
15 दिन में 13 लोगों पर हमला, स्कूल भी बंद
बंदर की शुरुआत में एक बुजुर्ग महिला पर हमला हुआ था जिसे villagers ने हल्के में लिया। लेकिन इसके बाद बंदर ने बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बनाकर कई बार हमला किया। स्कूल के परिसर में पेड़ पर बसेरा जमाकर यह बंदर बच्चों पर भी झपटता है। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं और स्कूल प्रबंधन भी परेशान है। ग्रामीणों ने बताया कि कई लोगों को बंदर ने इतनी बुरी तरह काटा कि टांके लगाने पड़े।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी, रैबीज़ का खतरा
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बंदर के काटने से रैबीज़ होने का खतरा बना रहता है। रतलाम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर संजय दुबे ने बताया कि बंदर, कुत्ते या अन्य जंगली जानवर के काटने पर रैबीज़ का संक्रमण हो सकता है। इसके लिए घाव को तुरंत बहते पानी से धोना और 24 घंटे के भीतर रैबीज़ वैक्सीन लगवाना आवश्यक होता है। डॉक्टर ने लोगों को प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी देते हुए सतर्क रहने की अपील की है।
वन विभाग की नाकामी, पिंजरा लगाकर भी नहीं पकड़ा गया बंदर
वन विभाग को इस बंदर की जानकारी दी गई और विभाग की टीम ने गांव में एक पिंजरा लगाया लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी बंदर नहीं पकड़ा गया। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभाकर चले गए। गांव के इश्वर सिंह ने कहा कि “हमारी जान खतरे में है और प्रशासन बस खानापूर्ति कर रहा है।”
प्रशासन हुआ हरकत में, लेकिन डर अब भी बरकरार
ग्रामीणों की मांग और मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन और वन विभाग की टीम गांव पहुंची है। स्वास्थ्य विभाग भी उन लोगों की निगरानी कर रहा है जो बंदर के हमले में घायल हुए हैं। हालांकि, तब तक गांव में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल बना हुआ है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और लोग घरों से बाहर निकलने में झिझक रहे हैं। ग्रामीण अब बंदर को पकड़वाने के लिए उच्च अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं।


