MP News: मध्यप्रदेश की आबादी हर साल औसतन 14.49 लाख बढ़ रही है जो कि ग्वालियर जैसे बड़े शहर की पूरी जनसंख्या के बराबर है। यह वृद्धि राज्य की प्राकृतिक वृद्धि दर पर आधारित है जो 1000 लोगों पर 16.1 है। वर्तमान में प्रदेश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 9 करोड़ मानी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि हर करोड़ पर लगभग 1.61 लाख और हर लाख पर 1610 लोगों की वृद्धि हो रही है।
जन्म और मृत्यु दर में बड़ा अंतर
SRS रिपोर्ट 2022 के अनुसार राज्य में औसतन जन्म दर 23.3 है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 25.1 है जबकि शहरी क्षेत्रों में केवल 18.2। मृत्यु दर 7.1 है जिसमें गांवों में 7.5 और शहरों में 6.2 दर्ज की गई है। इस आंकड़े से यह साबित होता है कि राज्य में जनसंख्या बढ़ने का कारण जन्म और मृत्यु दर के बीच का बड़ा फासला है।

कोविड के बाद बदला परिदृश्य
कोविड महामारी के दौरान राज्य में मौतों का आंकड़ा 7 लाख से ऊपर पहुंच गया था जो सामान्य आंकड़ों से लगभग 2 लाख ज्यादा था। वहीं जन्म पंजीकरण में भी उस समय कमी देखी गई थी। लेकिन कोविड के बाद जन्म दर में फिर से वृद्धि देखी गई और अब आंकड़े फिर से बढ़ने लगे हैं।
जनसंख्या स्थिरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
राज्य में कुल प्रजनन दर (TFR) अब घटकर 2.0 हो गई है जो कि रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से भी कम है। यह संकेत देता है कि अब महिलाएं इतनी संतान नहीं जन्म दे रही हैं जिससे अगली पीढ़ी की आबादी स्थिर रह सके। यह एक सकारात्मक संकेत है लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि भविष्य में बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि होगी जिससे स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की जरूरतें बढ़ेंगी।
युवाओं में निवेश और बुजुर्गों की तैयारी जरूरी
जनसंख्या विशेषज्ञ आलोक बाजपेई के अनुसार अब सरकार को दो मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए। पहला, युवाओं में निवेश करना जरूरी है ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। दूसरा, राज्य में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक होगा। साथ ही, शहरीकरण की रफ्तार के कारण जनसंख्या में असंतुलन आने की आशंका भी बढ़ रही है।


