MP News: मध्यप्रदेश के भिंड जिले में तहसीलदार माला शर्मा और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के बीच चल रहा विवाद अब और गंभीर होता जा रहा है। माला शर्मा वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। एक बार फिर उन्होंने कलेक्टर और गोहद एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर मानसिक प्रताड़ना और अधिकारों से वंचित करने की शिकायत की है। उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने एक ज़मीन विवाद में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई थी।
क़ीमती ज़मीन को लेकर उठा विवाद
इस पूरे मामले की जड़ एक सरकारी ज़मीन है जिसे तहसीलदार माला शर्मा ने दबंगों से मुक्त कराकर शासन की संपत्ति घोषित किया था। आरोप है कि गोहद एसडीएम पराग जैन ने इस ज़मीन को अपने रिश्तेदार प्रभोध जैन के नाम खसरे में दर्ज करवाया था। जब माला शर्मा ने इसका विरोध किया तो उन्हें टारगेट किया जाने लगा। उनके खिलाफ एसडीएम कोर्ट से अटैचमेंट ऑर्डर निकाला गया जबकि अदालत ने इस आदेश पर रोक लगा दी।

अधिकार छीनकर किया गया तबादला
माला शर्मा ने आरोप लगाया है कि अदालत से स्टे मिलने के बावजूद कलेक्टर ने उनके बुनियादी अधिकार छीन लिए। उन्होंने चिकित्सा अवकाश की अर्जी दी थी जो मंजूर नहीं की गई। इसके बाद उन्हें भिंड की लहार तहसील में ट्रांसफर कर दिया गया। उनका कहना है कि वहां पहले से एक तहसीलदार तैनात है फिर भी उन्हें इन-चार्ज तहसीलदार बनाकर भेजा गया। यह एक तरह से पदावनति है क्योंकि अब उन्हें नायब तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्यमंत्री को लिखा भावनात्मक पत्र
माला शर्मा ने सीधा मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि प्रदेश की सरकार महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा के साथ काम करने की बात करती है लेकिन जिले के दो वरिष्ठ अधिकारी उनकी गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मानसिक प्रताड़ना के कारण कुछ गलत हो गया तो इसके लिए सीधे तौर पर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और एसडीएम पराग जैन जिम्मेदार होंगे।
महिला अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल
यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि एक महिला अधिकारी को न्याय के लिए कितनी कठिन लड़ाई लड़नी पड़ती है। माला शर्मा की शिकायतें सिर्फ एक व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बल्कि एक महिला अधिकारी के आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई हैं। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री इस पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या महिला अधिकारियों को सिस्टम से न्याय मिलेगा।


