MP news: ग्वालियर-चंबल का इलाका बीजेपी के कई बड़े नेताओं की कर्मभूमि रहा है। नरेंद्र सिंह तोमर हों या ज्योतिरादित्य सिंधिया या फिर प्रद्युम्न सिंह तोमर। यहां से पार्टी के कई बड़े चेहरे निकले लेकिन इसके बावजूद भी यहां चुनावी आंकड़े पार्टी के पक्ष में नहीं आए। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 34 में से सिर्फ 18 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस ने 16 पर जीत दर्ज की। इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी में यह आंकड़ा पार्टी के लिए निराशाजनक माना गया।
हेमंत खंडेलवाल ने क्यों चुना सबसे पहले ग्वालियर-चंबल
बीजेपी के नव-नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी पहली औपचारिक यात्रा के लिए ग्वालियर-चंबल को ही चुना है। उनका मकसद यहां की जमीनी हकीकत को समझना और संगठन की कमजोरियों की पहचान करना है। वे स्थानीय पदाधिकारियों से मिलकर ये जानने की कोशिश करेंगे कि पार्टी क्यों अपेक्षित परिणाम नहीं ला पा रही है। यह दौरा मात्र औपचारिकता नहीं बल्कि एक शोध यात्रा के रूप में देखा जा रहा है।

नई नेतृत्व की तैयारी में जुटी पार्टी
सूत्रों की मानें तो अब पार्टी इस क्षेत्र में नए नेतृत्व को तैयार करने की योजना बना रही है। पुराने चेहरों के साथ-साथ नए लोगों को मौका दिया जाएगा। हेमंत खंडेलवाल स्वयं बदलाव को लेकर गंभीर हैं लेकिन वह अनुभव को भी उतना ही महत्व देते हैं। यही कारण है कि वह सिर्फ युवा चेहरों पर भरोसा नहीं कर रहे बल्कि पुराने अनुभवी नेताओं की राय को भी गंभीरता से ले रहे हैं।
कमजोरियों की पहचान और समाधान की दिशा
इस दौरे का सबसे अहम मकसद यही है कि उन कमजोरियों की पहचान की जाए जिनकी वजह से बीजेपी ग्वालियर-चंबल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके में पिछड़ रही है। पार्टी अब बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक के संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। संवाद, संगठन और समीकरणों की गहरी समीक्षा की जाएगी ताकि आने वाले चुनावों में कोई कसर न रह जाए।
वरिष्ठ नेताओं से भी ली जाएगी राय
हेमंत खंडेलवाल इस दौरे में सिर्फ कार्यकर्ताओं से ही नहीं बल्कि वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगे। वे पुराने नेताओं की सलाह को भी पार्टी के नवीनीकरण में शामिल करेंगे। यह दौरा न सिर्फ एक बदलाव की शुरुआत है बल्कि यह इस बात का संकेत है कि पार्टी अब जमीन से जुड़कर नई रणनीति बनाएगी जो आंकड़ों से ज्यादा कार्यकर्ताओं की भावना पर टिकी होगी।


