MP News: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी! न्यायपालिका में सामंती सोच और जातिगत भेदभाव पर उठाए सवाल

MP News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एक पीठ ने अपने हालिया फैसले में न्यायिक प्रणाली की अंदरूनी खामियों को उजागर करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के बीच रिश्ता सामंती और गुलामी जैसा बन चुका है। इस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि जब जिला अदालतों के न्यायाधीश हाईकोर्ट के जजों से मिलते हैं तो उनकी शारीरिक भाषा एक रीढ़विहीन जीव जैसी होती है, जो एक शर्मनाक और असमान प्रणाली की ओर इशारा करती है।

व्यावसायिक निर्णय बना सेवा समाप्ति का कारण

दरअसल, यह मामला जिला न्यायाधीश जगत मोहन चतुर्वेदी से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2015 में व्यापमं घोटाले के एक मामले में कुछ छात्रों को अग्रिम जमानत दी थी। इसी मामले में अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज भी की गई थी। इन अलग-अलग निर्णयों को लेकर हाईकोर्ट ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया, जिसे अब हाईकोर्ट ने गलत करार दिया है।

MP News: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी! न्यायपालिका में सामंती सोच और जातिगत भेदभाव पर उठाए सवाल

 हाईकोर्ट की व्यवस्था ने दबा दी जिला न्यायपालिका की रीढ़

फैसले में कहा गया कि जिला न्यायपालिका को अक्सर डर के साए में काम करना पड़ता है। हाईकोर्ट की अत्यधिक कठोरता और ‘अहम्’ भरा व्यवहार उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने से रोकता है। इतना ही नहीं, जिला जज हाईकोर्ट के जजों से मिलने रेलवे प्लेटफॉर्म तक जाते हैं और उनकी आवभगत करते हैं — यह एक असमान व्यवहार की दुखद मिसाल है।

जातिवाद की छाया में न्याय व्यवस्था

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य की न्यायिक व्यवस्था में जातिगत भेदभाव की परछाईं साफ नजर आती है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को ‘उच्च जाति’ और जिला न्यायपालिका को ‘शूद्र’ की तरह देखा जाता है। यह सोच न्यायाधीशों की मानसिक स्थिति और उनके फैसलों को प्रभावित करती है, जिससे निष्पक्ष न्याय प्रणाली बाधित होती है।

न्याय मिला, लेकिन देर से

हाईकोर्ट ने अब फैसला सुनाते हुए चतुर्वेदी को बर्खास्त करने के आदेश को अवैध ठहराया है। उन्हें सेवा समाप्ति की तारीख से लेकर सेवानिवृत्ति तक का वेतन सात प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया गया है। साथ ही सामाजिक अपमान के लिए ₹5 लाख का मुआवजा भी देने को कहा गया है। यह फैसला ना सिर्फ एक पीड़ित जज को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि पूरी न्यायिक प्रणाली के भीतर झांकने का अवसर भी देता है।

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