Who-Fi: आपके WiFi से हो रही है आपकी निगरानी? जानिए कैसे लीक हो रही है प्राइवेसी

आज के समय में तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि अब इंसानों की पहचान करने के लिए कैमरे की भी जरूरत नहीं रह गई है। एक नई तकनीक “Who-Fi” ने सबको चौंका दिया है। यह तकनीक बिना किसी कैमरे या माइक्रोफोन के आपकी पहचान कर सकती है और आपकी गतिविधियों को भी ट्रैक कर सकती है। इससे एक ओर जहां पहचान की पुष्टि में आसानी हो सकती है वहीं दूसरी ओर प्राइवेसी को लेकर बड़ी चिंता भी खड़ी हो गई है।

कैसे काम करती है Who-Fi तकनीक

Who-Fi एक उन्नत AI आधारित तकनीक है जो Wi-Fi सिग्नल और Transformer Neural Network का इस्तेमाल करती है। जब कोई व्यक्ति Wi-Fi के आस-पास चलता है या उसकी मौजूदगी होती है तो उसकी बॉडी से टकराकर Wi-Fi सिग्नल वापस लौटता है। यह लौटता हुआ सिग्नल अलग-अलग पैटर्न बनाता है जो इंसान की पहचान के लिए यूनिक होता है। ठीक वैसे ही जैसे उंगलियों के निशान या रेटिना स्कैन होते हैं। यह सिस्टम इन्हीं बदलावों को समझकर इंसान को पहचान लेता है।

Who-Fi: आपके WiFi से हो रही है आपकी निगरानी? जानिए कैसे लीक हो रही है प्राइवेसी

कैमरा नहीं फिर भी नज़र रखेगा

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी कैमरे या माइक्रोफोन की जरूरत नहीं होती। सिर्फ एक ऐंटीना ट्रांसमीटर और तीन ऐंटीना रिसीवर की मदद से यह पूरा सिस्टम काम करता है। यानी इसे इंस्टॉल करना बेहद सस्ता और आसान है। यही वजह है कि इसे फ्यूचर सर्विलांस सिस्टम के तौर पर देखा जा रहा है। यह इंसान की हरकतें पहचान सकता है यहां तक कि इशारों की भाषा यानी साइन लैंग्वेज भी समझ सकता है।

पहचान से निगरानी तक सब मुमकिन

Who-Fi सिस्टम सिर्फ किसी व्यक्ति की मौजूदगी को ट्रैक नहीं करता बल्कि दोबारा उस नेटवर्क एरिया में आने पर भी उसे पहचान सकता है। इससे यह तकनीक ना सिर्फ पहचान की पुष्टि में उपयोगी हो सकती है बल्कि किसी खास जगह पर निगरानी रखने में भी मदद कर सकती है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति किसी संवेदनशील क्षेत्र में बार-बार आता है तो यह सिस्टम उस पर निगरानी रख सकता है।

चिंता का विषय है प्राइवेसी

जहां यह तकनीक पहचान और सुरक्षा के लिए वरदान साबित हो सकती है वहीं डिजिटल प्राइवेसी को लेकर कई सवाल भी उठते हैं। बिना जानकारी के अगर कोई सिस्टम आपकी गतिविधियां ट्रैक कर रहा है तो यह निजता के हनन जैसा हो सकता है। सरकारों और तकनीकी कंपनियों को यह तय करना होगा कि इस तकनीक का इस्तेमाल पारदर्शिता और नियमों के तहत हो ताकि लोगों की गोपनीयता बनी रहे।

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