MP News: मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा का सच! पढ़ाने वाला कोई नहीं फिर भी दावे ऊंचे

MP News: मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं लेकिन असलियत कुछ और ही है। सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के हजारों पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है और शिक्षण गुणवत्ता को कमजोर कर रही है।

 सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों का संकट

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कुल 12,895 असिस्टेंट प्रोफेसर की स्वीकृत पद संख्या है लेकिन इनमें से सिर्फ 5,397 पद ही भरे गए हैं। शेष 7,498 पदों पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। इन खाली पदों की भरपाई के लिए विभाग ने 4,015 गेस्ट स्कॉलरों को तैनात किया है जो अस्थायी रूप से पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

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विश्वविद्यालयों की हालत और भी खराब

राज्य के विश्वविद्यालयों की स्थिति भी चिंताजनक है। कुल 1,069 स्वीकृत पदों में से 793 पद खाली हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के पांच विश्वविद्यालयों में एक भी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं है। इससे यह साफ है कि राज्य सरकार का शिक्षा के प्रति रवैया बेहद लापरवाह है।

लाइब्रेरियन की भी भारी कमी

शिक्षण संस्थानों में केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि पुस्तकालयों के लिए भी जरूरी स्टाफ की कमी है। सरकार ने 582 लाइब्रेरियन पद स्वीकृत किए हैं लेकिन केवल 236 पद ही भरे गए हैं। 346 पद आज भी खाली हैं जिससे छात्रों को पुस्तकालय की सुविधाएं भी सही ढंग से नहीं मिल पा रहीं।

विपक्ष ने उठाए सवाल तो सामने आई सच्चाई

कांग्रेस के विधायक पंकज उपाध्याय और संजय उईके ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया तो मंत्री इंदर सिंह परमार ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी। विपक्ष का कहना है कि यह राज्य की शिक्षा व्यवस्था की असल तस्वीर है। लगातार खाली पड़े पदों के चलते छात्रों की पढ़ाई पर गहरा असर हो रहा है।

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