MP News: मध्य प्रदेश में जब से डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली है, भाजपा ने नए उत्साह और रणनीतिक सोच के साथ प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चों पर काम किया है। वहीं, कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रही है। जनता से जुड़े मुद्दों जैसे महंगाई, अपराध और बेरोजगारी पर कांग्रेस का सड़कों पर कोई प्रभावी आंदोलन नहीं दिखा, न ही विधानसभा में उसे सरकार को घेरने में सफलता मिली।
युवा नेतृत्व के बावजूद कांग्रेस दिशाहीन
कांग्रेस हाईकमान ने एक नई शुरुआत करते हुए पार्टी की कमान युवा नेता जीतू पटवारी को सौंपी, जबकि उमंग सिंघार और हेमंत कटारे को क्रमशः नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया। लेकिन यह युवा नेतृत्व भी अब तक सरकार के खिलाफ कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाया है। खुद जीतू पटवारी विधानसभा में मौजूद नहीं हैं, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठते हैं।

मुद्दों पर चुप्पी, मौकों का नुकसान
बीते एक साल में कई ऐसे मौके आए जब कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकती थी—जैसे ‘लव जिहाद’ के मामले, 90 डिग्री ब्रिज में तकनीकी गड़बड़ियां, या ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की दुर्दशा। लेकिन कांग्रेस या तो चुप रही या केवल बयानबाजी तक सीमित रही। सरकार की गलतियों पर विपक्ष की चुप्पी ने भाजपा को और अधिक आत्मविश्वास से भर दिया है।
संगठनात्मक कमजोरी और बूथ स्तर पर गिरावट
कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कमजोर संगठन ढांचा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद यह स्वीकार चुके हैं कि कांग्रेस में नेता अधिक हैं और कार्यकर्ता कम। बूथ स्तर पर सक्रियता की कमी और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी ने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ाया है। जीतू पटवारी द्वारा किए गए प्रदर्शनों में भीड़ की कमी इस बात का प्रमाण है।
महिला, युवा और श्रमिक वर्ग से दूरी
कांग्रेस का महिला, युवा और कमजोर वर्गों से संवाद भी कमजोर होता जा रहा है। विधानसभा जैसे मंच पर इन वर्गों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में भी कांग्रेस विफल रही है। भाजपा जहां हर वक्त चुनावी मोड में दिखती है, वहीं कांग्रेस अभी तक जनता से जुड़ने के लिए कोई ठोस डिजिटल या जमीनी रणनीति नहीं बना पाई है।


