Shashi Tharoor को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 15 सितंबर को!

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित ‘शिवलिंग पर बिच्छू’ टिप्पणी को लेकर चल रही मानहानि की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया पर लगी रोक को आगे बढ़ा दिया है। अदालत ने यह रोक थरूर की ओर से वकील की याचिका पर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शिकायतकर्ता भाजपा नेता राजीव बब्बर के वकील से सवाल किया, “इतना भावुक क्यों हो रहे हो?” इस टिप्पणी ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा – ‘क्या खास कार्यवाही दिवस?’

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एमएम सुन्दरश और एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है। भाजपा नेता राजीव बब्बर के वकील ने तर्क दिया कि सुनवाई जल्द होनी चाहिए क्योंकि वह ‘मुख्य कार्यवाही दिवस’ है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया, “क्या खास कार्यवाही दिवस? इतनी भावुकता क्यों? चलिए इसे बंद ही कर देते हैं।” अदालत की यह टिप्पणी मामले की गंभीरता और पक्षकारों की भावनात्मक प्रतिक्रिया पर व्यंग्य की तरह देखी जा रही है।

Shashi Tharoor को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 15 सितंबर को!

थरूर की दलील – सिर्फ एक पुराने लेख का संदर्भ था

शशि थरूर की ओर से वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के 29 अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था और उन्हें 10 सितंबर को ट्रायल कोर्ट में पेश होने को कहा गया था। थरूर के वकील ने तर्क दिया कि न तो शिकायतकर्ता और न ही राजनीतिक पार्टी के सदस्य “अभिक्त पक्ष” (aggrieved party) कहलाते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि थरूर ने जो टिप्पणी की थी, वह वर्ष 2012 में Caravan मैगजीन में प्रकाशित एक लेख का हवाला मात्र था, जिसे उन्होंने “गुड फेथ” में दोहराया था, इसलिए यह दंडनीय नहीं है।

हाई कोर्ट की टिप्पणी – टिप्पणी आपत्तिजनक और घृणास्पद

दिल्ली हाई कोर्ट ने हालांकि यह माना था कि प्रधानमंत्री को लेकर की गई “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी आपत्तिजनक और घृणास्पद है। कोर्ट ने कहा कि यह टिप्पणी प्रधानमंत्री, भाजपा और इसके सदस्यों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतीत होती है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने थरूर को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष तलब करने को उचित ठहराया था। वहीं शिकायतकर्ता ने दावा किया कि धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। गौरतलब है कि 2018 में थरूर ने कथित रूप से कहा था कि एक आरएसएस नेता ने मोदी की तुलना “शिवलिंग पर बैठे बिच्छू” से की थी, जिसे उन्होंने “असाधारण रूपक” बताया था। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यह सिर्फ एक रूपक था, जिसका उद्देश्य अपमान करना नहीं था, बल्कि किसी विशेष राजनीतिक व्यक्तित्व की स्थिति को दर्शाना था।

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