Rahul Gandhi का तगड़ा हमला! अमेरिकी टैरिफ और रूस से तेल खरीद पर मोदी सरकार पर राहुल ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर लगाई गई टैरिफ की धमकियों और रूस से तेल खरीदने पर जुर्माने की बात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। Rahul Gandhi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मोदी सरकार ट्रंप के सामने खामोश है और इसकी वजह है अडानी पर अमेरिका में चल रही जांच। राहुल ने कहा कि मोदी जी के हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि अगर उन्होंने कुछ बोला तो अडानी और रूस के तेल सौदों से जुड़ी वित्तीय सच्चाई सामने आ सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप का ताजा हमला: भारत पर 25% से ज्यादा टैरिफ

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटों में भारत से आयात पर लगने वाला टैरिफ मौजूदा 25 प्रतिशत से और बढ़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने भारत और रूस दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को ‘मरी हुई अर्थव्यवस्था’ करार दिया। उनका आरोप है कि भारत रूस से लगातार तेल खरीद रहा है जो अमेरिका की नीति के खिलाफ है।

विदेश मंत्रालय का करारा जवाब: ये धमकियाँ बेतुकी हैं

4 अगस्त 2025 को भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप की धमकियों को “अविवेकपूर्ण और बेतुका” बताया। मंत्रालय ने कहा कि भारत रूस से तेल इसलिए खरीदता है क्योंकि यह हमारे आर्थिक और ऊर्जा-संबंधी जीवन का सवाल है न कि रूस के प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति। विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयान को भारत की संप्रभुता में दखल करार दिया और कहा कि भारत अपने हितों के लिए फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है।

राहुल गांधी ने फिर उठाया अडानी-मोदी का मुद्दा

राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच संबंधों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका में अडानी के खिलाफ चल रही जांच की वजह से प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप की धमकियों का कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं। राहुल ने यहां तक कहा कि अगर अडानी और रूस के बीच तेल सौदों में वित्तीय लेनदेन की सच्चाई सामने आ गई तो प्रधानमंत्री की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

राजनीतिक तूफान: क्या मोदी की चुप्पी चिंता की बात है?

यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। राहुल गांधी के आरोपों ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। एक ओर ट्रंप लगातार भारत को धमका रहे हैं तो दूसरी ओर देश का विपक्ष यह सवाल पूछ रहा है कि प्रधानमंत्री आखिर चुप क्यों हैं। क्या अडानी के साथ संबंध वाकई भारत की विदेश नीति को प्रभावित कर रहे हैं या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान है? आने वाले दिनों में इसका जवाब जरूरी होगा।

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