Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने 20 मासूम बच्चों को मधुमक्खियों के दल से बचाते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी। हजारों मधुमक्खियों के बीच खुद एक ढाल बनकर खड़ी यह बहादुर महिला का बलिदान पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। कंचन बाई ने अपने पूरे जीवन को बच्चों और महिलाओं की सेवा में समर्पित किया था। उनका यह अद्भुत त्याग न केवल उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि समाज के लिए भी बेहद चिंताजनक और दुखद है।
राज्य सरकार ने परिवार के साथ जताया दुख
इस कठिन समय में मध्य प्रदेश सरकार ने कंचन बाई के परिवार के साथ खड़ा होने का विश्वास दिलाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य अधिकारी परिवार को सांत्वना देते हुए कंचन बाई के योगदान को सदैव याद रखने और सम्मानित करने का भरोसा दिया है। सरकार ने इस संकट की घड़ी में परिवार को हर संभव मदद उपलब्ध कराने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कंचन बाई के परिवार को तत्काल ₹4 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम परिवार को तत्काल राहत देने के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

शिक्षा का बोझ सरकार ने उठाया
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि कंचन बाई के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन किया जाएगा। इससे न केवल बच्चों को शिक्षा की बाधा से मुक्ति मिलेगी बल्कि परिवार को भी आर्थिक रूप से स्थिरता मिलेगी। इस तरह की संवेदनशील पहल से सरकार ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया है। परिवार के लिए यह सहायता किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं है, क्योंकि शिक्षा ही बच्चों के उज्जवल भविष्य की कुंजी है। इस कठिन परिस्थिति में यह कदम उनके लिए जीवन संजीवनी साबित होगा।
अंतिम श्रद्धांजलि और सांत्वना
कंचन बाई की इस दुखद मृत्यु ने पूरे परिवार और समाज को झकझोर कर रख दिया है। उनके बलिदान को न केवल सरकार बल्कि समाज के हर तबके ने स्वीकार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रार्थना की कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और इस कठिन घड़ी में उनके परिवार को साहस दें। पूरे प्रदेश ने कंचन बाई के साहस और त्याग को याद करते हुए उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनके इस अदम्य साहस की गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। ओम शांति।


