MP News: दमोह अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला के साथ दर्दनाक अमानवीय व्यवहार का खुलासा

MP News: दमोह जिला अस्पताल में एक महिला के साथ प्रसव के दौरान कथित अमानवीय व्यवहार का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि प्रसव के समय नर्सों ने महिला पर हिंसा की और उसकी जांघों को कैंची से काटा गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक दर्द सहना पड़ा। पीड़िता की सास का कहना है कि सविता रायकर को जब प्रसव के दर्द हुआ तो रात लगभग 10 बजे उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां तैनात नर्सों ने न केवल गाली-गलौच की बल्कि शारीरिक रूप से भी हमला किया। इसके बाद जब सविता का प्रसव हो गया, तो परिवार से वार्ड में स्थानांतरण के लिए पैसा भी मांगा गया।

जिलाधिकारी ने मामले की तुरंत जांच के आदेश दिए

घटना की सूचना पीड़िता के परिवार ने लगभग 3 बजे सुबह जिला कलेक्टर को दी। कलेक्टर ने सिविल सर्जन डॉ. प्रह्लाद पटेल को मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच के तहत संबंधित नर्सों के बयान दर्ज किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने भी जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। जिला कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कहा कि यदि महिला के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ है तो यह निंदनीय है और जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

MP News: दमोह अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला के साथ दर्दनाक अमानवीय व्यवहार का खुलासा

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े

यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों और परिवार ने अस्पताल की सेवा गुणवत्ता पर चिंता जताई है। डॉ. प्रह्लाद पटेल ने बताया कि जांच कमेटी का गठन किया गया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में समग्र व्यवस्था की निगरानी की जा रही है और मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का प्रयास जारी है। इस तरह की घटनाएं न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं, बल्कि अस्पताल की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

आगे की कार्रवाई और सुधार की उम्मीद

जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा। साथ ही अस्पताल में मरीजों के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियां और सुधार लागू किए जाने की उम्मीद है। इस मामले ने पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बहस छेड़ दी है। उम्मीद की जा रही है कि इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर सुविधा और सम्मान मिलेगा।

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