MP News: खंडवा में छात्रा का सवाल बना सियासी तूफान, शिक्षा में जाति आधारित सुविधाओं पर उठे सवाल

MP News: मध्य प्रदेश के खंडवा जिला में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल पूरी तरह बदल गया जब अन्य पिछड़ा वर्ग की एक छात्रा ने शिक्षा में जातिगत भेदभाव का मुद्दा खुलकर उठा दिया। कार्यक्रम में राज्य के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह मौजूद थे। मंच से उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा, छात्रावास, आवास भत्ता, नीट और पीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग की घोषणा की। इसी दौरान छात्रा ने सीधे सवाल किया कि जब शिक्षा सबके लिए है तो फिर सुविधाएं जाति के आधार पर क्यों दी जा रही हैं। इस सवाल ने न केवल मंत्री बल्कि कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी असहज कर दिया।

मंत्री और मंच पर छाया सन्नाटा

छात्रा का सवाल इतना सटीक और तीखा था कि कुछ क्षणों के लिए पूरे कार्यक्रम में सन्नाटा छा गया। मंत्री विजय शाह ने जवाब में केवल इतना कहा कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। लेकिन छात्रा यहीं नहीं रुकी। उसने अगले ही दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात कर वही सवाल दोहराया। मुख्यमंत्री के खंडवा दौरे के दौरान छात्रा ने कहा कि सरकारी शैक्षणिक सुविधाएं जाति के बजाय आर्थिक स्थिति के आधार पर दी जानी चाहिए। उसका तर्क था कि हर वर्ग में गरीब और पिछड़े लोग हैं और केवल जाति के आधार पर लाभ बांटने से वास्तविक जरूरतमंद पीछे छूट जाते हैं।

MP News: खंडवा में छात्रा का सवाल बना सियासी तूफान, शिक्षा में जाति आधारित सुविधाओं पर उठे सवाल

आर्थिक आधार पर सुविधाओं की मांग

छात्रा ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान व्यवस्था में कई ऐसे लोग लाभ उठा रहे हैं जिन्हें वास्तव में इन सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है। वहीं ओबीसी और सामान्य वर्ग की कई छात्राएं ऐसी हैं जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में एससी एसटी वर्ग की छात्राओं को किताबें और स्टेशनरी दी जा रही हैं जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग की छात्राएं इन सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में जिन परिवारों के पास किताबें खरीदने तक के पैसे नहीं हैं उनकी पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित होती है। छात्रा ने साफ कहा कि अधिकारों में समानता तभी आएगी जब सुविधाओं का आधार जाति नहीं बल्कि जरूरत होगी।

सरकार ने दिया विचार का आश्वासन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्रा की बात को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस विषय पर विचार किया जाएगा। छात्रा का कहना है कि यदि व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ तो समाज से पिछड़ापन कभी खत्म नहीं होगा। उसने कहा कि शिक्षा में समान अवसर ही किसी भी समाज को आगे बढ़ा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में नई बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या अब समय आ गया है कि शिक्षा से जुड़ी सरकारी सुविधाओं को जाति से ऊपर उठाकर आर्थिक जरूरत से जोड़ा जाए। छात्रा की यह आवाज कई और विद्यार्थियों की आवाज बनती नजर आ रही है।

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