MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर-भोजपुर के भूमरिया गांव में एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। साल 2004 में घर से लापता हुए राजू (बदला हुआ नाम) पूरे 22 साल बाद सुरक्षित कश्मीर के कुपवाड़ा से वापस लौट आए। बेटा तो उन्हें मृत मान चुका था, लेकिन पत्नी ने हमेशा यह विश्वास बनाए रखा कि एक दिन उनका पति जरूर लौटेंगे। आखिरकार, उनकी उम्मीद साकार हुई और राजू घर लौट आए।
लापता होने के बाद की अनसुलझी कहानी
राजू साल 2004 में अचानक घर से गायब हो गए थे। परिजनों ने उन्हें खोजने के लिए हर संभव कोशिश की और पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। राजू कई वर्षों तक भटकते रहे और अंततः मध्य प्रदेश से हजारों किलोमीटर दूर कश्मीर के कुपवाड़ा पहुंचे। इतने सालों तक उनके रहस्य और परिस्थितियां अज्ञात रही। साल 2025 में उनकी खराब मानसिक स्थिति को देखकर कुपवाड़ा पुलिस ने उन्हें श्रीनगर के मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉ. मारिया जहूर और समाजसेवी डॉ. सज्जाद उर रहमान बट्ट की देखरेख में उनका इलाज हुआ। धीरे-धीरे उनकी याददाश्त लौटने लगी और उन्होंने राजगढ़ का पता बताया।

पत्नी का धैर्य और बेटे की परवरिश
राजू की पत्नी की कहानी त्याग और धैर्य की मिसाल है। पति के लापता होने के बाद उन्होंने अपने मायके संवासड़ा (कालीपीठ) में रहकर बेटे को अकेले पाल-पोसकर बड़ा किया। उन्होंने कभी दूसरी शादी नहीं की क्योंकि उन्हें विश्वास था कि राजू एक ना एक दिन लौटेंगे। जब राजू गायब हुए, उनका बेटा मात्र 2 साल का था। आज वही बेटा 24 साल का है और उसकी अपनी एक बेटी भी है। पत्नी ने धैर्य और विश्वास के साथ परिवार को संभाला और बेटे की शादी भी करवाई।
कुपवाड़ा पुलिस ने दी सूचना और घर वापसी का नजारा
राजू की याददाश्त वापस लौटने के बाद उन्होंने पुलिस को अपना एड्रेस बताया। कुपवाड़ा पुलिस ने खिलचीपुर पुलिस से संपर्क किया और 15 फरवरी 2026 को राजू को घर तक पहुँचाया। घर वापसी का नजारा बेहद भावुक था। 22 साल पहले जो बेटा पिता की उंगली पकड़कर चलता था, आज उसने अपने पिता को सहारा दिया। राजू ने अपनी पोती को पहली बार गोद में लिया और पत्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवार और रिश्तेदारों ने इसे ईश्वरीय चमत्कार बताया।


