Kuno National Park Cheetah Birth: मध्य प्रदेश के शिवपुर जिले में स्थित कुनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत दक्षिण अफ्रीका से यहां लाए गए महिला चीते गामिनी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। यह कुनो में नौवीं सफल चीता जन्म घटना है। इस जन्म के साथ ही भारत में अब तक जीवित बचे चीता शावकों की संख्या 27 हो गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी प्रजाति का नए वातावरण में सफल प्रजनन करना सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण परीक्षण होता है। कुनो में लगातार सफल जन्म यह प्रमाणित करता है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र चीता संरक्षण के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताई खुशी
इस उपलब्धि पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, “यह अत्यंत हर्ष की बात है कि गामिनी, जो प्रोजेक्ट चीता के तहत दक्षिण अफ्रीका से लाई गई थी, ने तीन शावकों को जन्म दिया।” उन्होंने बताया कि चीते के कुनो नेशनल पार्क आने के तीन वर्षों में यह नौवीं सफल जन्म घटना है। इस सफलता के साथ भारत में कुल चीते की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। 70 साल पहले, भारत में चीते लगभग विलुप्त घोषित हो गए थे। ऐसे में प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य चीता की संख्या को बढ़ाना और उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

गामिनी की दूसरी प्रेग्नेंसी और पुनर्वास की सफलता
गामिनी की दूसरी गर्भावस्था यह स्पष्ट संकेत देती है कि कुनो का प्राकृतिक वातावरण चीते के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीते यहां सुरक्षित रूप से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि चीते केवल आकर्षक वन्यजीव नहीं हैं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गामिनी के शावकों का जन्म यह दर्शाता है कि भारत ने लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में ठोस और सफल कदम उठाए हैं।
कुनो नेशनल पार्क बन रहा विश्वस्तरीय मॉडल
आज कुनो नेशनल पार्क वैश्विक स्तर पर चीता पुनर्वास का सफल उदाहरण बनता जा रहा है। यहां लगातार जन्म लेने वाले शावक और सफल प्रजनन इस बात का प्रमाण हैं कि परियोजना का दृष्टिकोण सही दिशा में है। गामिनी के तीन नए शावक न केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक हैं, बल्कि यह संकेत हैं कि भारत में लुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के प्रयास सार्थक और टिकाऊ साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कुनो में यह सफलता न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैविक विविधता के लिए भी लाभदायक है।


