MP News: मध्यप्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नई परिवहन नीति के विरोध में निजी बस संचालकों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सागर में रविवार (22 फरवरी) को आयोजित एक बड़े सम्मेलन में प्रदेशभर से आए बस ऑपरेटरों ने सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई और 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया। बस संचालकों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे पूरे प्रदेश में बसों का संचालन बंद कर देंगे। ऐसे में लाखों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां निजी बसें ही आवागमन का प्रमुख साधन हैं।
55 जिलों से पहुंचे प्रतिनिधि, सरकार पर गंभीर आरोप
यह सम्मेलन मध्यप्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन के बैनर तले सागर में आयोजित किया गया, जिसमें 55 जिलों से 400 से अधिक बस ऑपरेटर्स, जिला अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय ने की। मंच से प्राइम रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने सरकार की नई नीति का कड़ा विरोध जताया। जिला स्तर के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रस्तावित नीति निजी बस कारोबार के लिए नुकसानदेह साबित होगी। उनका आरोप है कि सरकार की यह पहल धीरे-धीरे निजी ऑपरेटरों को खत्म कर परिवहन व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में कदम है।

‘मालिक से किराएदार’ बनाने का आरोप, बेरोजगारी का खतरा
बस ऑपरेटर्स का सबसे बड़ा आरोप है कि नई व्यवस्था उन्हें मोटर मालिक से किराएदार बना देगी। उनका कहना है कि बसें भले ही निजी ऑपरेटरों की हों, लेकिन नियंत्रण और संचालन की कमान सरकार या उससे जुड़ी कंपनियों के हाथ में होगी। इससे स्वतंत्र व्यवसाय खत्म हो जाएगा और ऑपरेटर केवल अनुबंध पर काम करने वाले बनकर रह जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन के अनुसार सरकार करीब 20 साल बाद फिर से सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने जा रही है, लेकिन अपनी बसें न खरीदकर पीपीपी मॉडल के जरिए सात निजी कंपनियों से छह-छह महीने के अनुबंध किए जाएंगे। ऑपरेटर्स को आशंका है कि धीरे-धीरे नई बसें लगाकर पुराने संचालकों को बाहर कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि इससे ड्राइवर, कंडक्टर, क्लीनर और छोटे मालिकों सहित हजारों परिवारों पर बेरोजगारी का संकट मंडराएगा।
अप्रैल 2026 से लागू होगी नीति, तीन स्तरीय ढांचा तैयार
सरकार की योजना के अनुसार अप्रैल 2026 से नई परिवहन नीति लागू की जानी है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच सस्ती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है। योजना के तहत राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई जाएगी, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। संभाग स्तर पर सात कंपनियां संचालन देखेंगी, जबकि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां किराया और रूट तय करेंगी। बस ऑपरेटर्स ने मांग की है कि 24 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित नीति और 29 जनवरी के संशोधन को वापस लिया जाए तथा वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी, जिससे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था ठप पड़ सकती है।


