MP News: गढ़ाकोटा रहस मेले में मुख्यमंत्री ने दिए 196 करोड़ रुपये, बुंदेलखंड में हर्ष का माहौल

MP News: मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ाकोटा में करीब 200 साल पुराने रहस लोकोत्सव मेले में इस बार खास रौनक देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे और कई विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि पूजन किया। मंच से उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम लोगों के लिए सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार हर वर्ग के साथ खड़ी है। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए प्रदेश के 32.78 लाख से अधिक हितग्राहियों के खातों में 196.72 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए।

गोपाल भार्गव के बयान ने बढ़ाई चर्चा

मंच पर सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मंत्री और रहली विधायक गोपाल भार्गव के बयान की रही। उन्होंने बुंदेलखंड की मिट्टी और यहां के लोगों के स्वाभिमान की बात करते हुए कहा, “हम बुंदेलखंड के लोग हैं. हम गरीब हो सकते हैं, परेशान हो सकते हैं, लेकिन गद्दार नहीं हो सकते।” उनके इस बयान पर पंडाल तालियों से गूंज उठा। भार्गव ने रहस मेले को बुंदेलखंड की पहचान और धरोहर बताया और कहा कि यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।

MP News: गढ़ाकोटा रहस मेले में मुख्यमंत्री ने दिए 196 करोड़ रुपये, बुंदेलखंड में हर्ष का माहौल

मुख्यमंत्री ने बुंदेली वीरता और विकास योजनाओं को किया उजागर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में बुंदेलखंड की वीर परंपरा को याद किया और यहां के शौर्य को नमन किया। उन्होंने कहा कि गढ़ाकोटा आकर ऐसा लगा मानो सारे त्योहार एक साथ मन गए हों। मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट देने की जानकारी दी और सिंचाई, अन्न सुरक्षा और ग्रामीण विकास की योजनाओं का जिक्र किया। इसके साथ ही बीड़ी और तेंदूपत्ता उद्योगों को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए खेल और स्टेडियम कॉम्प्लेक्स बनाने की भी घोषणा की।

रहस मेला सांस्कृतिक और राजनीतिक संदेश का मंच

गढ़ाकोटा का रहस मेला कोई सामान्य मेला नहीं है। इसकी शुरुआत सन 1809 में राजा मर्दन सिंह जूदेव के राज्यारोहण की स्मृति में हुई थी। अंग्रेजी शासन के दौरान यह मेला व्यापार और क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकों का केंद्र भी रहा। आज यह आयोजन सांस्कृतिक परंपरा और जनकल्याण योजनाओं का मंच बन चुका है। कार्यक्रम में दमोह और सागर संसदीय क्षेत्र के सांसद, खुरई विधायक और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। यह मेला बुंदेलखंड की अस्मिता, सांस्कृतिक धरोहर और विकास योजनाओं का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।

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