MP News: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बंगाल में राष्ट्रपति अपमान की घटना की निंदा की

MP News: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आदिवासियों की सभा को संबोधित करने पहुंचने पर राज्य की ममता सरकार की लापरवाही सामने आई। राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद थीं और न ही कोई अन्य मंत्री। इस घटना ने राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र के सर्वोच्च पद की गरिमा पर सवाल खड़ा कर दिया। यह मामला केवल औपचारिकता का नहीं बल्कि राष्ट्रपति के सम्मान और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि का भी मुद्दा बन गया।

राष्ट्रपति की गरिमा का ध्यान रखना राज्य का दायित्व

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित राष्ट्रपति का दौरा राजनीति से ऊपर है और किसी भी राज्य की सरकार को उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री या अन्य मंत्री की गैर-मौजूदगी न केवल अनुचित है बल्कि यह पद की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है। उनका कहना था कि ऐसे हालात किसी भी राज्य के लिए शर्मनाक हैं और राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

MP News: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बंगाल में राष्ट्रपति अपमान की घटना की निंदा की

राजनीतिक मनोवृत्ति ने राष्ट्रपति के दौरे को विवादित बनाया

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को घृणित मानसिकता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे को हल्की राजनीति का हिस्सा बनाना और इसे स्थानीय या दलगत राजनीति में घसीटना बेहद दुखद है। उनका कहना था कि ऐसे कदम न केवल संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं बल्कि लोकतंत्र के प्रति असम्मान भी प्रदर्शित करते हैं। डॉ. यादव ने उम्मीद जताई कि ममता बनर्जी इस मामले को गंभीरता से लेंगी और तुरंत माफी मांगेंगी।

राज्य सरकार के लिए यह बेहद शर्मनाक स्थिति

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान इस प्रकार की उपेक्षा राज्य और देश दोनों के लिए शर्मनाक है। उनका कहना था कि संवैधानिक पदों का सम्मान सभी के लिए सर्वोपरि होना चाहिए। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि भारत में लोकतंत्र का पालन केवल नियमों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें पदों की गरिमा और सम्मान बनाए रखना भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना ने पश्चिम बंगाल सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है।

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