MP News: मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुरू, स्टाइपेंड और महंगाई भत्ते को लेकर विरोध

MP News: मध्य प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी है। यह हड़ताल स्टाइपेंड में महंगाई भत्ते के संशोधन और बकाया भुगतान को लेकर की जा रही है। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से सीपीआई आधारित स्टाइपेंड लागू करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। इसी मुद्दे को लेकर राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों ने काम बंद कर विरोध जताया है। हालांकि मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए समानांतर ओपीडी की व्यवस्था की गई है, जहां सीमित स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। हड़ताल का यह पहला दिन है, इसलिए अभी अस्पतालों में स्थिति सामान्य दिखाई दे रही है, लेकिन अगर यह विरोध लंबे समय तक चलता है तो स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।

मरीजों को होने लगी परेशानी, डायलिसिस मरीज ने जताई नाराजगी

हड़ताल के पहले दिन भले ही अस्पतालों में ज्यादा अव्यवस्था नहीं दिखी, लेकिन कुछ मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर डायलिसिस कराने आए एक मरीज ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उसका डायलिसिस नहीं हो पाया। अस्पताल प्रशासन और वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों को राहत देने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सीनियर डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को संभाल रहे हैं ताकि गंभीर मरीजों की जान पर कोई खतरा न आए। हालांकि मरीजों और उनके परिजनों में यह चिंता बनी हुई है कि अगर यह हड़ताल कई दिनों तक जारी रही तो इलाज में देरी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

MP News: मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुरू, स्टाइपेंड और महंगाई भत्ते को लेकर विरोध

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने सरकार के सामने रखी मांगें

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड में संशोधन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीपीआई आधारित स्टाइपेंड 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है, जिससे डॉक्टरों में भारी नाराजगी है। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मिलने वाले एरियर के भुगतान को लेकर भी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक वे नियमित ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। हड़ताल कर रहे डॉक्टर भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में टेंट लगाकर प्रतीकात्मक रूप से ओपीडी का संचालन कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पताल की व्यवस्था में जूनियर डॉक्टरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। आमतौर पर अस्पतालों में 60 से 70 प्रतिशत तक काम जूनियर डॉक्टर ही संभालते हैं। ऐसे में यदि उनकी हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं और नियमित इलाज व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सीनियर डॉक्टर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक यह व्यवस्था चलाना मुश्किल हो सकता है। गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में राज्यभर के डॉक्टरों ने शुक्रवार से ही काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध शुरू किया था, जो अब हड़ताल में बदल गया है। अब सबकी नजर सरकार पर है कि वह डॉक्टरों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और यह विवाद कब तक सुलझता है।

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