MP News: सेमसन मार्टिन की आत्महत्या ने फैक्ट्री प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल और जांच शुरू

MP News: रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री खमरिया से जुड़ी ऑर्डनेंस फैक्ट्री में एक गंभीर और दुखद घटना सामने आई है। यहां कार्यरत 57 वर्षीय चार्जमैन सेमसन मार्टिन ने आज फैक्ट्री परिसर के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। फैक्ट्री प्रशासन और पुलिस ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है।

सुसाइड नोट में काम का अधिक दबाव

सूत्रों के अनुसार सुसाइड नोट में सेमसन मार्टिन ने अपने काम से जुड़े तनाव और दबाव का जिक्र किया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्हें सिविल मेंटेनेंस सेक्शन में जिम्मेदारी दी गई थी। इस नई जिम्मेदारी में तकनीकी समस्याओं और अत्यधिक कार्यभार के कारण उनका मानसिक दबाव बढ़ गया। हालांकि नोट में किसी व्यक्ति विशेष पर प्रताड़ना का सीधा आरोप नहीं लगाया गया है। यह घटना यह दर्शाती है कि कर्मचारियों के काम का दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है।

परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

सेमसन मार्टिन के परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी पत्नी का कहना है कि उनके पति मूल रूप से जनरल फिटर थे, लेकिन उन्हें ठेकेदार से जुड़े काम सौंप दिए गए थे, जिनका उन्हें अनुभव नहीं था। बिल बनाने और प्रक्रिया को लेकर उन्हें लगातार दबाव में रखा गया। परिजनों का आरोप है कि एक बिल में मात्र 8 रुपये के अंतर को लेकर अधिकारियों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था, जिससे वह अत्यधिक परेशान हो गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि कर्मचारियों के काम में उचित मार्गदर्शन और सहारा न मिलने पर मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

विभाग बदलने की मांग और फैक्ट्री की प्रतिक्रिया

परिजनों ने यह भी बताया कि सेमसन मार्टिन ने कई बार विभाग बदलने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। घटना से एक दिन पहले भी वह तनाव में थे, लेकिन खुलकर कुछ नहीं बताया। फैक्ट्री प्रशासन ने घटना को दुखद बताते हुए आंतरिक जांच की बात कही है। थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी के अनुसार, सुसाइड नोट और परिजनों के आरोपों के आधार पर हर पहलू से जांच की जा रही है। इस घटना ने रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित फैक्ट्रियों में कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यभार के प्रबंधन पर सवाल खड़ा कर दिया है।

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