MP News: धर्मनगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां शुरू होते ही एक नया विवाद सामने आ गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति उलझ गई है। हैरानी की बात यह है कि दो अलग-अलग अखाड़ों के संत, जिनका नाम रवींद्र पुरी है, खुद को परिषद का असली अध्यक्ष बता रहे हैं। इस घटनाक्रम ने धार्मिक जगत के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन से पहले यह विवाद सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है।
निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी की सक्रिय भूमिका
पिछले करीब छह महीनों से निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी उज्जैन में लगातार सक्रिय थे। वे सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों का जायजा ले रहे थे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें कर रहे थे। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वे निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं को लेकर दिशा-निर्देश दे रहे थे। अब तक संत समाज और प्रशासन दोनों ही उन्हें अखाड़ा परिषद का निर्विवाद अध्यक्ष मान रहे थे। उनकी सक्रियता और नेतृत्व को लेकर किसी तरह का विवाद सामने नहीं आया था।
महानिर्वाणी अखाड़े के दावे से बढ़ी उलझन
रविवार को स्थिति तब बदल गई जब महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी महाराज उज्जैन पहुंचे और खुद को परिषद का असली अध्यक्ष घोषित कर दिया। उनके इस दावे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 13 में से 8 अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार वैष्णव, उदासीन, संन्यासी और निर्मल संप्रदाय उनके साथ हैं और हरिद्वार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उन्हें अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वे पहली बार उज्जैन आए हैं, लेकिन सिंहस्थ की तैयारियों पर उनकी नजर लगातार बनी हुई थी और वे प्रशासन से संपर्क में रहे हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती और आगे की राह
इस पूरे विवाद ने प्रशासन को भी असमंजस में डाल दिया है। सिंहस्थ महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन के लिए सभी अखाड़ों का एकजुट होना बेहद जरूरी होता है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर दो दावेदार सामने आने से स्थिति जटिल हो गई है। अब सवाल यह है कि अखाड़ा परिषद का वास्तविक नेतृत्व किसके हाथ में है और इसका समाधान कैसे निकलेगा। आने वाले दिनों में 13 अखाड़ों के बीच बैठकें और बातचीत इस विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस घटनाक्रम ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।


