MP News: गुना में हवाला मामले ने पुलिस की ईमानदारी पर उठाए गंभीर सवाल, एसपी को फटकार

MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक सनसनीखेज हवाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है। यह मामला गुजरात के एक जीरा व्यापारी से कथित तौर पर ₹20 लाख की अवैध वसूली से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश जारी किए हैं कि इस घटना में शामिल एसपी को हटाया जाए और पुलिस महानिदेशक (DGP) ने मामले की त्वरित जांच के आदेश दिए हैं।

व्यापारी से ₹20 लाख की कथित वसूली

रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात का यह व्यापारी अपने स्कॉर्पियो वाहन (GJ05 RK 9351) में लगभग ₹1 करोड़ नगद लेकर यात्रा कर रहा था। जैसे ही वह एनएच-46 के पगारा टोल प्लाजा पर पहुंचा, पुलिसकर्मियों ने उसकी गाड़ी रोकी और उसे रुथियाई पुलिस आउटपोस्ट ले जाया। आरोप है कि पुलिस ने हवाला उल्लंघन के बहाने व्यापारी पर दबाव बनाया और फिर मामले को ‘सुलझाने’ के नाम पर ₹20 लाख की राशि वसूल ली। इसके बाद धरणवाड़ा पुलिस ने व्यापारी से ₹1 करोड़ में से ₹20 लाख वसूल कर उसे और उसकी गाड़ी को छोड़ दिया। इस घटना ने पुलिस की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

एसपी ने दोषी पुलिसकर्मियों को फटकारा

यह मामला तब उजागर हुआ जब व्यापारी ने गुजरात के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को शिकायत दर्ज कराई। अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद यह मामला गुना एसपी के संज्ञान में आया। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को फटकार लगाई गई और व्यापारी से वसूला गया ₹20 लाख उसे वापस कर दिया गया। यह घटनाक्रम गुना पुलिस विभाग के लिए कलंक जैसा साबित हुआ है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सिवनी में हवाला राशि के मामले में पुलिस विभाग को पहले ही अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा था। ऐसे में गुना की यह घटना पुलिस की विश्वसनीयता पर एक और बड़ा सवाल खड़ा करती है।

जांच और भविष्य की कार्रवाई

अब सवाल यह उठता है कि जांच पूरी होने के बाद किन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री और DGP ने स्पष्ट किया है कि किसी भी लापरवाही या दुराचार के मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गुना पुलिस में इस घटना से विभागीय सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता फिर से उजागर हुई है। यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं और पुलिस विभाग अपनी विश्वसनीयता को बहाल करने में कितने सक्षम साबित होता है।

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