MP News: अधूरी योजनाओं के बावजूद पंचायतों पर थोपे गए बिजली बिल, ग्रामीण परेशान

MP News: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के लेटरी तहसील में ‘जल जीवन मिशन’ की वास्तविकता चौंकाने वाली है। लगभग 20 ग्राम पंचायतों में न तो किसी घर तक पानी पहुंचा है और न ही पानी के लिए किसी प्रकार की ठोस व्यवस्था बनी है, लेकिन बिजली के बिल लाखों में जरूर आए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में यह दिखाया गया है कि जलपंप चालू हैं, जबकि जमीन पर यह योजनाएं पूरी नहीं हुई हैं। यह गंभीर लापरवाही और सरकारी तंत्र में गंभीर गड़बड़ी को उजागर करता है।

सबसे चौंकाने वाला मामला वीरपुर कला पंचायत का है। यहां न तो जल टैंक बनाया गया और न ही ट्यूबवेल खोदा गया, फिर भी पंचायत को लगभग 4.5 लाख रुपये का बिजली बिल भेजा गया। यह स्थिति केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे लेटरी ब्लॉक में कई पंचायतों में समान समस्या देखी जा रही है।

अधूरी योजनाओं के बावजूद भारी बिल

ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों ने पाइपलाइन बिछाई लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया। वहीं, बिजली विभाग ने बिना किसी भौतिक जांच के कनेक्शन को चालू मान लिया। परिणामस्वरूप, जहां पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई, वहां भी पंचायतों के खाते में भारी बिजली बिल थोप दिए गए। शाहरखेडा ग्राम पंचायत में 86 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत परियोजना पांच साल बाद भी अधूरी है, लेकिन 18 लाख रुपये का बिल भेजा गया। इसी तरह, मुंद्रा रतनसिंह पंचायत को अधूरी परियोजना के लिए 1.5 लाख रुपये का बिल मिला।

ग्रामीण गर्मी के मौसम में जब घर-घर पानी पहुंचने की उम्मीद कर रहे थे, तब भी उन्हें पानी लेने के लिए दूर-दूर जाना पड़ रहा है। योजना की कागजी दावे और जमीन पर हकीकत में बड़ा अंतर नजर आता है।

सरपंचों ने जताया विरोध: बिना उपयोग के बिल असंगत

लेटरी सरपंच संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा का कहना है कि आधी से अधिक पंचायतों में नलजल योजना रुकी हुई है। कई योजनाएं पंचायतों को आधिकारिक रूप से सौंप भी नहीं गई हैं, लेकिन चालू होने का दिखावा कर उन्हें बिजली के बिल थोप दिए गए हैं। सरपंचों ने पूरी पंचायतों में भौतिक निरीक्षण कराने की मांग की है और कहा है कि बिना पानी के बिल वसूल करना पूरी तरह अनुचित है।

शिकायतों के बाद कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने पीएचई, बिजली और पंचायत विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई और इस स्थिति पर कड़ा विरोध जताया। बिजली विभाग को मनमाने बिलिंग के संबंध में जवाब देने के लिए तलब किया गया, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। अधिकारियों को एक-दूसरे के साथ समन्वय करके मामले को तुरंत हल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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