MP News: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह रामनवमी के अवसर पर अयोध्या पहुंचे और राम मंदिर में जाकर भगवान राम के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने हनुमान गढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। कांग्रेस नेता ने अपने आस्था भरे शब्दों में कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति वहां जाता है और उनके लिए यह एक आध्यात्मिक अनुभव था।
कांग्रेस में आस्था और धर्म का महत्व
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार धर्म का पालन करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म का प्रयोग किसी व्यवसाय या राजनीति के लिए नहीं किया जाता। राम मंदिर और रामलला के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम सबके इष्ट हैं और उनकी जन्मभूमि की सर्वमान्यता है। उनका राघोगढ़ स्थित निवास भी भगवान राम के नाम से जुड़ा हुआ है, जो उनकी व्यक्तिगत आस्था को दर्शाता है।
राम मंदिर आंदोलन और राजनीतिक दृष्टिकोण
पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन और निर्माण के संबंध में कहा कि हर व्यक्ति अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा करता है। उन्होंने राहुल गांधी के रामलला दर्शन पर पूछे गए सवाल पर कहा कि इसका उत्तर केवल राहुल गांधी ही दे सकते हैं और उन्हें इसमें कोई एतराज नहीं है। दिग्विजय सिंह का यह दौरा आस्था और राजनीति के बीच संतुलन को दर्शाता है और उनके व्यक्तित्व की धर्मनिष्ठ छवि को भी सामने लाता है।
महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर स्वागत और मोहन यादव की प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह के अयोध्या आगमन पर महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि उनका स्वागत है और भगवान राम जब सद्बुद्धि दें तब सही। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हल्की खींचतान पैदा कर दी है और दिग्विजय सिंह के दौरे को चर्चा का विषय बना दिया है।


