MP News: Janaki Devi द्वारा दायर तलाक याचिका पर कुटुंब न्यायालय में लंबी सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी प्रमुख आधारों को स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद की याचिका मंजूर कर ली है। यह फैसला कई वर्षों से चल रहे इस पारिवारिक विवाद में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद यह आदेश पारित किया है।
विवाह और अलगाव की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार Narayan Sai और जानकी देवी का विवाह वर्ष 2008 में हुआ था। हालांकि यह वैवाहिक संबंध लंबे समय तक सफल नहीं रहा। वर्ष 2013 से दोनों अलग रह रहे थे। याचिका में यह आरोप लगाया गया कि पति द्वारा परित्याग किया गया जिसके बाद जानकी देवी अपनी मां के साथ रहने लगीं। इस लंबे अलगाव ने रिश्ते को और अधिक जटिल बना दिया और अंततः कानूनी प्रक्रिया की ओर मामला बढ़ गया।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पति ने वैवाहिक संबंधों का पालन नहीं किया और अन्य महिलाओं के साथ अनैतिक संबंध बनाए। इसके साथ ही यह तथ्य भी कोर्ट के समक्ष रखा गया कि सूरत की अदालत में नारायण साईं के खिलाफ रेप का मामला चला था और उन्हें सजा भी सुनाई जा चुकी है। सुनवाई के दौरान नारायण साईं की ओर से उनके अधिवक्ता द्वारा कोई ठोस तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया। इस मामले की कार्यवाही को सार्वजनिक रूप से सीमित रखने की बात भी सामने आई है।
भरण पोषण और आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत ने भरण पोषण के मामले में भी महत्वपूर्ण आदेश दिया है। धारा 125 सीआरपीसी के तहत किए गए आवेदन पर न्यायालय ने जानकी देवी को 50 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही लगभग 50 लाख रुपये की बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया भी जारी है। अधिवक्ता के अनुसार संपत्ति का पूरा विवरण कलेक्टर को सौंपा गया है और सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। आदेश की विस्तृत प्रति का अध्ययन करने के बाद आगे हाई कोर्ट में अपील करने पर निर्णय लिया जाएगा।


