MP News: मध्य प्रदेश में आज से गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने इस बार खरीदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि वे निर्धारित उपार्जन केंद्रों पर पहुंचकर इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और पूरी प्रक्रिया सरल, तेज और प्रभावी तरीके से संपन्न हो।
उपार्जन केंद्रों पर सुविधाएं और प्रशासनिक निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके तहत पेयजल, छायादार स्थान, बैठने की उचित व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने सभी कलेक्टर्स और एसडीएम को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। साथ ही, उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क भी स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसानों को किसी भी जानकारी या सहायता के लिए भटकना न पड़े। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं, जिससे पूरे सिस्टम पर लगातार नजर रखी जा सके।
किसान कल्याण वर्ष और सरकार की योजनाएं
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं और सुधार लागू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गेहूं उपार्जन जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण गतिविधियों में सामाजिक और सेवाभावी संस्थाओं को भी आगे आकर सहयोग करना चाहिए, ताकि व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके। किसानों को उनकी आय और लाभ सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर नीतिगत फैसले ले रही है।
वर्चुअल संवाद और भविष्य की योजनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से किसान प्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल संवाद भी किया, जिसमें उन्होंने उपार्जन व्यवस्था की तैयारियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और गेहूं की खरीद मूल्य को 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जो किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके अलावा, उपार्जन केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से किसानों को योजनाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय के कंट्रोल रूम से भी पूरे सिस्टम की निगरानी की जाएगी, जिससे किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।


