भारत की महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट चीता की सफलता की कहानी ने एक और महत्वपूर्ण मोड़ लिया है दक्षिण अफ्रीका से आए चीता भाई प्रभास और पावक ने गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में 365 दिन का सफल प्रवास पूरा किया है। यह सिर्फ एक साल की यात्रा नहीं रही बल्कि जंगल के सम्मान भाईचारे और अनुशासन की रोमांचक गाथा बन गई है
दोनों चीतों के प्रदर्शन ने 365 दिनों में वन्यजीव विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया है। प्रभास और पावक ने 150 से अधिक शिकार किए हैं जो उनकी तेजी और अनुकूलन क्षमता को दिखाता है। उन्हें जंगल के भीतर 1460 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर अपना क्षेत्र बनाया गया है। गांधीसागर की अच्छी जलवायु के कारण उनका वजन भी लगभग चार किलो बढ़ा है जो उनके अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है
18 फरवरी 2023 को प्रभास और पावक भारत आए। शुरुआत में उन्हें कूनो नेशनल पार्क में रखा गया जहां उन्होंने लगभग दो वर्षों तक खुद को ढाला जो भारत में हुआ था। गांधीसागर में खुले पानी ने उनकी ताकत और साहस को और अधिक बढ़ा दिया
वन विभाग का कहना है कि दोनों भाइयों के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला है जो कोएलिशन का सबसे अच्छा उदाहरण है। अक्सर वे भोजन या आराम करते समय अपनी पीठ एक दूसरे से जोड़कर बैठते हैं जिससे वे चारों ओर देखते रहते हैं। उनकी रणनीति भी शिकार के दौरान बहुत सटीक होती है। जब एक चीता शिकार को थका देता है तो दूसरा उसे घात लगाकर पकड़ लेता है। यदि एक व्यक्ति की गति धीमी पड़ती है तो दूसरा व्यक्ति उसका साथ नहीं छोड़ता जो उनके गहरे भरोसे का प्रतीक है
साफ सफाई का व्यवहार भी उनकी सेहत का एक बड़ा कारण है। वन टीम ने ऑटोग्रूमिंग खुद की सफाई और एलोग्रूमिंग एक दूसरे को साफ करना जैसी आदतों को भी दर्ज किया है। जिससे उनका शरीर साफ और संक्रमण से सुरक्षित रहता है उनकी जीभ पर मौजूद केराटिनाइज्ड पैपिला कंघी की तरह काम करती है।


