MP News: सतना में कुपोषण से मासूम की मौत स्वास्थ्य तंत्र पर उठे बड़े सवाल

MP News: मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है जहां कुपोषण के कारण चार माह की मासूम बच्ची सुप्रांशी की मौत हो गई। यह घटना इसलिए भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि महज एक महीने के भीतर यह दूसरी ऐसी मौत है जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

जुड़वां भाई के साथ भर्ती, लेकिन नहीं मिल सका समय पर इलाज

सुप्रांशी को उसके जुड़वां भाई नैतिक के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों बच्चे लंबे समय से कुपोषण की समस्या से जूझ रहे थे और उनकी हालत पहले से ही नाजुक थी। मंगलवार को जब उनकी स्थिति ज्यादा खराब हुई तो परिजनों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। हालांकि इलाज शुरू किया गया लेकिन सुप्रांशी की हालत लगातार बिगड़ती रही और बुधवार को उसकी मौत हो गई। वहीं उसके भाई नैतिक की हालत भी गंभीर बनी हुई है और उसे बेहतर इलाज के लिए रीवा रेफर किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समय रहते सही इलाज और पोषण मिलता तो यह जान बचाई जा सकती थी।

एनआरसी रेफरल में लापरवाही ने बढ़ाया संकट

जानकारी के अनुसार टीकाकरण के दौरान ही बच्ची का वजन बेहद कम पाया गया था जो गंभीर कुपोषण का संकेत था। इसके बावजूद उसे पोषण पुनर्वास केंद्र यानी एनआरसी नहीं भेजा गया। यह लापरवाही अब जानलेवा साबित हुई है। मझगवां अस्पताल में जांच के दौरान नैतिक का वजन करीब 2.953 किलोग्राम और सुप्रांशी का 2.862 किलोग्राम दर्ज किया गया जो उनकी उम्र के हिसाब से बहुत कम है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में तुरंत विशेष देखभाल और पोषण की जरूरत होती है। लेकिन समय पर उचित कदम नहीं उठाए जाने के कारण स्थिति और बिगड़ती चली गई।

जवाबदेही की मांग और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि बच्ची अति कुपोषित थी और अचानक उसकी हालत बिगड़ गई जिससे उसकी मौत हो गई। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की तत्काल जरूरत है ताकि मासूमों की जान बचाई जा सके।

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