धार जिला बना सड़क हादसों का हॉटस्पॉट ब्लैक स्पॉट्स ने बढ़ाई चिंता

तीन बड़े राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े इस जिले में सड़क हादसों की संख्या भी सर्वाधिक है ट्रैफिक विभाग ने इस जिले में 14 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं जिनमें से 5 राष्ट्रीय राजमार्गों पर और 8 राज्य राजमार्गों पर हैं।

तिरला बायपास के पास हाल ही में एक पिकअप वाहन पलटने से 16 लोगों की मौत हो गई थी जो एक ब्लैक स्पॉट था। जिले में हो रहे हादसे और मौतें चिंता का विषय हैं। अब इन ब्लैक स्पॉट्स को ट्रैफिक इंजीनियरिंग में सुधारने का काम शुरू हो गया है।

धार जिला दुर्घटनाओं में काफी आगे है। यहां हर महीने औसतन 190 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 50 से अधिक लोग मर जाते हैं। 2023 में 711 2024 में 614 और 2025 में 600 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर गए। यह जिला तीन राष्ट्रीय राजमार्गों राज्य मार्गों और अन्य सड़कों से घिरा हुआ है इसलिए यहां अधिक ट्रैफिक दबाव और हादसों की संख्या होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर सही ट्रैफिक इंजीनियरिंग की कमी हादसों का सबसे बड़ा कारण है। ढाबा मालिकों ने सड़कों पर अवैध कट बनाए हैं जो वाहनों की आवाजाही को बढ़ाता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाता है। मानपुर से मांडू और रतलाम जाने वाले मार्गों पर भारी ट्रैफिक है लेकिन वहां बहुत संकरा कट दिया गया है जिससे दुर्घटनाओं की संभावना अधिक है। इसके अलावा घुमावदार मोड़ तीखी ढलान और तेज रफ्तार भी दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह हैं। रेल सेवा नहीं होने से सड़क यातायात पर अधिक दबाव है और रात में बड़ी संख्या में यात्री बसें इन मार्गों पर चलती हैं।

धार जिले का सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट गणेशघाट था जहां पिछले दशक में 300 से अधिक लोग मारे गए थे। यहां ढलान पर वाहन अनियंत्रित हो गया जिससे ब्रेक फेल हुआ और दुर्घटनाएं हुईं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 108 करोड़ रुपये की लागत से एक बायपास बनाया जो इस ब्लैक स्पॉट को खत्म कर दिया।

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