प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 6 जून को मध्यप्रदेश के दौरे पर आने वाले हैं। इस प्रस्तावित दौरे को लेकर राज्य सरकार और प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय हो गया है और तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर जो अटकलें पिछले कुछ महीनों से लगाई जा रही थीं, फिलहाल उन पर विराम लगता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान प्रधानमंत्री के दौरे और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर केंद्रित है।
मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों पर फिलहाल लगा ब्रेक
मध्यप्रदेश में बीते कई महीनों से मंत्रिमंडल विस्तार और बड़े फेरबदल की चर्चाएं लगातार चल रही थीं, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसी किसी भी संभावना को टाल दिया गया है। भाजपा संगठन और राज्य सरकार का फोकस इस समय प्रधानमंत्री के दौरे को सफल बनाने पर है। पार्टी के भीतर भी स्पष्ट संकेत दिए जा रहे हैं कि अभी संगठनात्मक स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी संकेत दिए हैं कि फिलहाल संगठन का पूरा ध्यान आगामी चुनावी रणनीतियों और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर है। ऐसे में राजनीतिक बदलाव की चर्चाओं को फिलहाल विराम मिल गया है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा में बढ़ी रणनीतिक हलचल
प्रदेश में अब नजरें राज्यसभा की तीसरी सीट पर टिक गई हैं, जिसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा की ओर से यह संकेत दिए जाने के बाद कि वह इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारेगी, कांग्रेस खेमे में उत्साह और सक्रियता बढ़ गई है। कांग्रेस के कई बड़े नेता इस सीट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। पार्टी के भीतर रणनीतिक बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है ताकि सर्वसम्मति से उम्मीदवार तय किया जा सके।
PM दौरे और राज्यसभा समीकरण से बदला राजनीतिक माहौल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और राज्यसभा चुनाव के समीकरणों ने मध्यप्रदेश की राजनीति का माहौल पूरी तरह बदल दिया है। भाजपा संगठन जहां प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटा है, वहीं कांग्रेस राज्यसभा सीट को लेकर अपने राजनीतिक अवसरों को मजबूत करने में लगी हुई है। दोनों ही दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह दोनों घटनाएं प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। फिलहाल सभी की निगाहें 6 जून के प्रधानमंत्री दौरे पर टिकी हुई हैं।


