CBSE OSM सिस्टम घोटाला या तकनीकी गड़बड़ी छात्रों में मचा बड़ा बवाल

CBSE ने इस साल पहली बार 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM के जरिए करवाई। इस डिजिटल प्रक्रिया में छात्रों की कॉपियों को स्कैन कर कंप्यूटर स्क्रीन पर मूल्यांकन किया गया। शुरुआत में इसे पारदर्शिता और तेजी लाने वाला कदम बताया गया था, लेकिन 13 मई 2026 को रिजल्ट जारी होते ही स्थिति बदल गई। पासिंग प्रतिशत 85.20% रहने के बावजूद छात्रों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। शिकायतों में कहा गया कि कई कॉपियों के पेज गायब थे, स्कैनिंग धुंधली थी और सही उत्तरों के बावजूद अंक काट दिए गए। देखते ही देखते यह मामला शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला विवाद बन गया।

छात्रों के आरोप और सिस्टम पर सवाल

रिजल्ट के बाद देशभर से छात्रों की शिकायतें आने लगीं कि डिजिटल कॉपी और असली उत्तर पुस्तिका में मेल नहीं था। कई छात्रों ने दावा किया कि पुराने सिस्टम में जहां शिक्षक आंशिक रूप से प्रयास के अंक दे सकते थे, वहीं OSM में केवल मार्किंग स्कीम के अनुसार सख्ती से अंक दिए गए, जिससे स्कोर कम हो गया। इसके साथ ही यह भी आरोप लगा कि कुछ कॉपियों में जवाब सही होने के बावजूद मूल्यांकन में उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इन शिकायतों ने पूरे डिजिटल मूल्यांकन मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए और छात्रों में असंतोष तेजी से बढ़ने लगा।

टेंडर और कंपनी चयन पर विवाद गहराया

इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब OSM सिस्टम के टेंडर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए। हैदराबाद की कंपनी Coempt EduTeck को यह ठेका 5 दिसंबर 2025 को दिया गया था। आरोप हैं कि टेंडर की शर्तों में तीन बार बदलाव किए गए ताकि कुछ बड़ी कंपनियां बाहर हो जाएं। सबसे विवादित दावा यह है कि इस प्रक्रिया में TCS जैसी कंपनियों की बोली से काफी कम कीमत पर लगभग 60 प्रतिशत कम दर पर ठेका दिया गया। साथ ही यह भी सामने आया कि जिस कंपनी को ठेका मिला, उसका पुराना नाम ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज था, जिस पर पहले भी परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। यह खुलासा पूरे चयन प्रक्रिया पर संदेह बढ़ाने वाला साबित हुआ।

साइबर सुरक्षा और संसद तक पहुंचा मामला

विवाद सिर्फ टेंडर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। कुछ एथिकल हैकर्स ने दावा किया कि सिस्टम की सुरक्षा कमजोर थी और छात्र डाटा तक पहुंच संभव थी। इसी बीच री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर भी साइबर अटैक की खबर आई, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता पर और सवाल उठे। मामला तब और गंभीर हो गया जब 17 साल के एक छात्र ने संसद की स्थायी समिति के सामने पूरे OSM सिस्टम की खामियों पर प्रस्तुति दी। इसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई और विपक्ष ने शिक्षा मंत्री तक के इस्तीफे की मांग कर दी। सरकार ने जांच कमेटी गठित कर दी है और आगे की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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