भोपाल से देवबंद और अलवर तक फैला नेटवर्क, आतंक मॉड्यूल की परतें खुलनी शुरू

मध्य प्रदेश एटीएस की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। भोपाल से शुरू हुई जांच उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक पहुंची, जहां से तीन संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई। मामले में कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और ऑनलाइन नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

भोपाल से शुरू हुई जांच

मध्य प्रदेश एटीएस ने लोन वुल्फ मॉड्यूल से जुड़े होने के संदेह में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार भोपाल के काजी कैंप निवासी मोहम्मद फराज को इस मॉड्यूल का मुख्य आरोपी माना जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि उसके पास से कुछ संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।

पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि फराज कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित कुछ हैंडलर्स के संपर्क में था। एटीएस को आशंका है कि वह विदेश में प्रशिक्षण हासिल करने की तैयारी कर रहा था। हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल एजेंसियां उसके डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही हैं।

दो और राज्यों तक पहुंची कार्रवाई

फराज की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के देवबंद से नईम अब्दुल्ला और राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि नईम ने कथित तौर पर संपर्क स्थापित करने में भूमिका निभाई जबकि शाकिर मॉड्यूल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहा था। तीनों से पूछताछ जारी है।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बने जांच का केंद्र

एटीएस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इस नेटवर्क से और लोग जुड़े हुए थे तथा उनकी गतिविधियां कितनी व्यापक थीं।

भोपाल को लेकर बढ़ी चिंता

पिछले कुछ वर्षों में भोपाल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें सुरक्षा एजेंसियों ने कट्टरपंथी या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसी कारण शहर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में ऐसे मामलों की निगरानी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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