Bihar Election से पहले तेजस्वी की ‘अगस्त क्रांति’ का ऐलान! सत्ता के खिलाफ बिगुल बजा

Bihar Election: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक गतिविधियाँ जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार नई घोषणाएँ कर रहे हैं, वहीं विपक्ष भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने ‘अगस्त क्रांति’ के जरिए पूरे राज्य में आंदोलन का ऐलान किया है। यह अभियान अगस्त महीने में जनता से सीधे संवाद और रैलियों के माध्यम से चलाया जाएगा।

तेजस्वी बोले – “अब सड़कों पर उतरूंगा”, राहुल गांधी भी लेंगे भाग

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के समन्वय समिति की बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि रक्षाबंधन (9 अगस्त) के बाद से राज्य के नौ मंडलों में राष्ट्रीय स्तर के नेता रैलियां करेंगे। उन्होंने बताया कि वह खुद मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) और राज्य में बढ़ते अपराध के मुद्दे पर सड़क पर उतरेंगे। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 दिनों में राज्य में 100 हत्याएँ हुई हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठता है।

Bihar Election से पहले तेजस्वी की 'अगस्त क्रांति' का ऐलान! सत्ता के खिलाफ बिगुल बजा

 क्यों अगस्त में ही क्रांति की बात कर रहे हैं विपक्षी दल?

विपक्ष ‘अगस्त क्रांति’ शब्द का इस्तेमाल करके जनता को आज़ादी की लड़ाई की याद दिला रहा है। 1942 में महात्मा गांधी ने अगस्त महीने में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की थी। ‘करो या मरो’ जैसे नारे के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने वाला साबित हुआ। विपक्ष अब उसी ऐतिहासिक भावना को भुनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि जनता का जुड़ाव बढ़ाया जा सके।

नीतीश सरकार का पलटवार – नई घोषणाओं से साध रहे वोटर

नीतीश कुमार भी विपक्ष की इस रणनीति को भांप चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कई योजनाओं की घोषणा कर जनमानस को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹1000 से बढ़ाकर ₹3000 कर दिया गया है, ममता कार्यकर्ताओं को हर डिलीवरी पर ₹600 दिए जाएंगे। इसके अलावा पत्रकारों की पेंशन भी ₹6000 से बढ़ाकर ₹15000 कर दी गई है। साथ ही, विकास योजनाओं पर भी ₹650 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है।

किसके पाले में जाएगा बिहार का जनमत?

बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में संभावित हैं। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष की ‘अगस्त क्रांति’ लोगों को कितना प्रभावित करती है और क्या वह नीतीश कुमार के लंबे शासन को चुनौती देने में सफल हो पाती है या फिर नीतीश की घोषणाएँ और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता फिर से सत्ता की कुर्सी दिला पाएगी। राजनीतिक रणभूमि सज चुकी है, फैसला जनता को करना है।

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