Bhopal News: भोपाल के पिपलिया गांव में रहने वाले 40 वर्षीय पेंडे खान को कोबरा सांप से खेलना इतना भारी पड़ गया कि उनकी जान पर बन आई। पेंडे खान ने कोबरा को हाथ में पकड़ रखा था और बार-बार उससे खेल रहा था। स्थानीय लोगों ने जब उसे सांप से छेड़छाड़ करते देखा तो वीडियो भी बना लिया। लेकिन खेल के दौरान जैसे ही उसकी पकड़ ढीली हुई, कोबरा ने पहले उसकी हथेली और फिर कंधे पर काट लिया। ज़हर तेजी से शरीर में फैल गया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां अब वह वेंटिलेटर पर है। उसकी हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।
अमरोहा में भी रील बनाते समय सांप ने डसा
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हैबतपुर गांव में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया जहां 50 वर्षीय किसान जितेन्द्र कुमार को रील बनाते समय सांप ने ज़हर दे दिया। जितेन्द्र ने सांप को दीवार से निकालकर पकड़ लिया और लोगों के सामने स्टंट करने लगा। वह सांप को अपनी गर्दन में लपेटकर रील बना रहा था और नशे में धुत होकर उसे चूमने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही उसने अपनी जीभ सांप के पास ले जाई, सांप ने झपट्टा मारा और उसकी जीभ पर काट लिया। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे रेफर कर दिया गया।

रील की सनक और सोशल मीडिया का खतरा
इन दोनों मामलों में एक बात सामान्य रही—रील बनाने और दूसरों को दिखाने की सनक। सोशल मीडिया पर वाहवाही पाने के चक्कर में लोग अपनी जान तक जोखिम में डाल रहे हैं। सांप जैसे खतरनाक जीव से छेड़छाड़ करना न केवल कानूनन गलत है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। भोपाल और अमरोहा की घटनाएं इस बात का स्पष्ट उदाहरण हैं कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
सांप के काटने के बाद हालात बेहद गंभीर
पेंडे खान और जितेन्द्र दोनों ही फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। भोपाल वाले केस में पेंडे के शरीर में ज़हर फैलने की वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। वहीं अमरोहा के जितेन्द्र को भी गंभीर हालत में रेफर किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि कोबरा और अन्य ज़हरीले सांपों के डसने पर समय रहते इलाज मिलना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी देर जानलेवा साबित हो सकती है।
सबक: सांप से न करें रोमांच, जान है तो जहान है
सांप से खेलना या उसे पकड़कर रील बनाना बहादुरी नहीं बल्कि मूर्खता है। वन्यजीवों से दूर रहना ही समझदारी है। यदि कोई सांप दिखे तो वन विभाग या प्रशिक्षित विशेषज्ञों को बुलाना चाहिए। रोमांच की चाह में जान जोखिम में डालना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ लाइक पाने के लिए ज़िंदगी दांव पर लगाना आत्मघाती कदम है।


