Bhopal ROB Bridge Controversy: भोपाल ROB पुल घोटाले में सात इंजीनियर सस्पेंड, मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती और तुरंत लिया एक्शन

Bhopal ROB Bridge Controversy: भोपाल के ऐशबाग में बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (ROB) में लापरवाही और अजीब डिजाइन को लेकर मचे विवाद पर अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी में चल रहे इस निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के दो चीफ इंजीनियर समेत कुल 7 इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। यही नहीं एक रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। सरकार की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अब निर्माण कार्यों में लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

90 डिग्री मोड़ वाला ब्रिज बना मज़ाक का पात्र

इस ROB को लेकर सोशल मीडिया पर बीते कई दिनों से खूब चर्चा हो रही थी। वजह थी इसकी अजीबोगरीब डिजाइन जिसमें एक सीधा 90 डिग्री का मोड़ बना दिया गया था। आम लोग ही नहीं बल्कि कई तकनीकी विशेषज्ञों ने भी इस डिजाइन पर सवाल उठाए थे। लोग पूछने लगे थे कि क्या यह ब्रिज वाहन चालकों की सुविधा के लिए बनाया जा रहा है या किसी दुर्घटना को न्योता देने के लिए। जब बात ज्यादा बढ़ी तो खुद मुख्यमंत्री ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। जांच समिति ने रिपोर्ट में निर्माण कार्य में तकनीकी खामियों और भारी लापरवाही की पुष्टि की।

Bhopal ROB Bridge Controversy: भोपाल ROB पुल घोटाले में सात इंजीनियर सस्पेंड, मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती और तुरंत लिया एक्शन

डिजाइन बनाने वाली एजेंसी और कंसल्टेंट पर भी गिरी गाज

मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति ने साफ किया कि ROB की डिजाइन में कई गंभीर त्रुटियां थीं। इन त्रुटियों के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई। दो चीफ इंजीनियर समेत आठ इंजीनियरों पर गाज गिरी है। वहीं इस डिजाइन को तैयार करने वाली एजेंसी और उससे जुड़े डिजाइन कंसल्टेंट को भी सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यानी अब ये एजेंसियां किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। इससे एक बड़ा संदेश गया है कि गुणवत्ता और सुरक्षा में चूक करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।

काम पूरा होने तक नहीं होगा उद्घाटन

अब सरकार ने ROB के डिजाइन और निर्माण में आवश्यक सुधार के लिए एक नई तकनीकी कमेटी बना दी है। यह कमेटी निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि जब तक सभी तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया जाता और निर्माण पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक इस पुल का उद्घाटन नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जनता की सुरक्षा और हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं और किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई एक सख्त संदेश है कि मध्य प्रदेश की सरकारी योजनाओं में अब गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। अब राज्य के अन्य निर्माण कार्यों पर भी सख्त निगरानी और जवाबदेही तय की जाएगी।

लेटेस्ट न्यूज़
- Advertisment -

धार्मिक

error: Content is protected !!